नई दिल्ली। भारतीय मुद्रा बाजार में सोमवार को बड़ी हलचल देखने को मिली, जब रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले तेज गिरावट के साथ खुला। शुरुआती कारोबार में रुपया करीब 40 पैसे टूटकर 94.88 प्रति डॉलर के स्तर पर पहुंच गया। इससे पहले शुक्रवार को यह 94.48 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। रुपये में आई इस कमजोरी ने बाजार और निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का सीधा असर वैश्विक कच्चे तेल बाजार पर पड़ा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 3 प्रतिशत से ज्यादा उछलकर 104 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के प्रस्ताव को “अस्वीकार्य” बताए जाने के बाद बाजार में अनिश्चितता और बढ़ गई। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयातित तेल से पूरा करता है, इसलिए कच्चे तेल की कीमत बढ़ने पर डॉलर की मांग भी बढ़ जाती है। इसका सीधा दबाव रुपये पर पड़ता है। बढ़ती तेल कीमतों के कारण भारत की 10 वर्षीय बॉन्ड यील्ड भी 7 प्रतिशत के करीब पहुंच गई है। हालांकि, कुछ बैंकरों का मानना है कि, हाल के दिनों में डॉलर की लंबी पोजिशन कम होने से रुपये को थोड़ी मजबूती मिल सकती है। लेकिन यदि वैश्विक तनाव और तेल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो आने वाले समय में रुपया और दबाव में आ सकता है।
