जेईई मेंस की रिजल्ट घोषित, कबीर छिल्लर ने 300 में से 300 अंक लाकर हासिल की रैंक -1

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कोटा। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी द्वारा जारी जेईई मेन के रिजल्ट में इस बार भी कोटा का दबदबा देखने को मिला। कोटा के छात्र कबीर छिल्लर ने 300 में 300 अंक हासिल कर ऑल इंडिया रैंक 1 प्राप्त की। टॉप 10 में कोटा में पढ़ने वाले 4 छात्रों ने जगह बनाई, जिसमें पांचवां, छठा और आठवां स्थान भी शामिल है।देश की सबसे बड़ी और प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा JEE Main 2026 (Session 2) के परिणाम घोषित कर दिए गए हैं। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा जारी इन नतीजों ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि कामयाबी का रास्ता ‘कोचिंग सिटी’ कोटा की गलियों से होकर गुजरता है। इस साल की परीक्षा में कोटा का जबरदस्त दबदबा रहा, जहां टॉप-10 की सूची में कोटा के 4 छात्रों ने अपना कब्जा जमाया है। इसमें सबसे चमकता सितारा बनकर उभरे हैं कबीर छिल्लर, जिन्होंने 300 में से पूरे 300 अंक हासिल कर ऑल इंडिया रैंक-1 (AIR-1) अपने नाम की है।

लाखों की भीड़ में कोटा के जांबाजों का जलवा

इस साल सेशन-2 की परीक्षा में करीब 11.23 लाख अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया था, जो इस मुकाबले की कड़ी प्रतिस्पर्धा को दर्शाता है। इतने बड़े स्तर की परीक्षा में कोटा के कबीर छिल्लर ने न सिर्फ टॉप किया, बल्कि परफेक्ट स्कोर लाकर सबको चौंका दिया। कबीर के अलावा टॉप-10 में कोटा के अन्य छात्रों ने पांचवें, छठे और आठवें स्थान पर अपनी जगह पक्की की है, जिससे पूरे शहर में जश्न का माहौल है।

परिवार का शैक्षणिक माहौल बना ताकत

कबीर के पिता मोहित छिल्लर खुद आईआईटीयन हैं और फिलहाल दिल्ली-एनसीआर में एक निजी कंपनी में काम करते हैं। उनकी मां प्रियंका छिल्लर एक प्राइवेट स्कूल में शिक्षिका हैं। कबीर इससे पहले 10वीं कक्षा में 98 प्रतिशत अंक ला चुके हैं। कबीर का कहना है कि उनकी सफलता के पीछे सबसे बड़ा कारण फैकल्टी का सही मार्गदर्शन और खुद की पढ़ाई पर फोकस रहा। उन्होंने हर टेस्ट के बाद अपना मूल्यांकन किया और जहां कमी महसूस हुई, उसे सुधारने के लिए मेहनत की।

मॉक टेस्ट, डीप एनालिसिस और कॉन्सेप्ट क्लियरिटी पर जोर

कबीर ने नियमित मॉक टेस्ट दिए और हर पेपर के उत्तरों को गहराई से समझा। उन्होंने रटने की बजाय हर टॉपिक को समझने और उसे परीक्षा में सही तरीके से लागू करने पर ध्यान दिया। उन्होंने अपनी पढ़ाई को छोटे-छोटे लक्ष्यों में बांटा, शॉर्ट नोट्स बनाए और नियमित रिवीजन को आदत बना लिया। हर टेस्ट के बाद कमजोरियों पर काम किया और गलतियों को दोहराने से बचने की रणनीति अपनाई।