हैदराबाद। तेलंगाना की आध्यात्मिक विरासत को एक नया आयाम देने के लिए राज्य सरकार मूसी नदी के तट पर मंचिरेवुला में एक भव्य मंदिर परिसर का निर्माण करने जा रही है। भविष्य की “दक्षिणा काशी” के रूप में पहचाने जाने वाले इस प्रोजेक्ट को मूसी रिवरफ्रंट कायाकल्प योजना (MRRD) के सबसे अहम हिस्से के तौर पर देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना की आधारशिला रख दी है, जिसकी कुल अनुमानित लागत लगभग 700 करोड़ रुपये है।
आठ एकड़ की विशाल भूमि पर बनने वाले इस परिसर का मुख्य आकर्षण श्री ओंकारेश्वर स्वामी मंदिर होगा। इसके साथ ही यहाँ श्री ललिता महा त्रिपुरा देवी, श्री वीरभद्रकाली और श्री बाला गणपति जैसे कई अन्य देवताओं के मंदिर भी स्थापित किए जाएंगे। इस पूरे परिसर का स्थापत्य यूनेस्को विश्व धरोहर ‘रामप्पा मंदिर’ से प्रेरित होगा, जो पारंपरिक भारतीय मंदिर वास्तुकला और ‘आगम शास्त्र’ के प्राचीन सिद्धांतों पर आधारित होगा। यहाँ एक भव्य ‘महाराजा गोपुरम’ के साथ यज्ञशाला, प्रवचन मंडपम और कल्याण मंडपम जैसी आधुनिक सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी।
सरकार का लक्ष्य इसे एक अंतरराष्ट्रीय आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र बनाना है। इसके लिए मास्टर प्लान तैयार करने हेतु विशेषज्ञों की नियुक्ति की जा रही है, जो यहाँ ‘नक्षत्र वनम’ जैसे प्राकृतिक तत्वों को स्थानीय पर्यावरण के साथ जोड़ेंगे। यहाँ न केवल श्रद्धालुओं के लिए विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचा जैसे जल आपूर्ति, भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा प्रणालियाँ होंगी, बल्कि इसे सार्वजनिक परिवहन से भी बेहतर ढंग से जोड़ा जाएगा।
दिलचस्प बात यह है कि, यह प्रोजेक्ट राज्य की धार्मिक समावेशिता का प्रतीक बनेगा। ओंकारेश्वर मंदिर के साथ-साथ सरकार ने पुरानापुल में एक मस्जिद, गौलीगुडा में गुरुद्वारा और नागोले में एक भव्य चर्च बनाने का भी खाका तैयार किया है। मास्टर प्लान के अगले छह महीनों में तैयार होने की उम्मीद है, जिसके बाद आगामी 30 महीनों के भीतर इस “विशाल धार्मिक हब” को साकार करने का लक्ष्य रखा गया है।
