रायपुर। प्रदेश की राजधानी में पानी की सप्लाई के नाम पर एक बड़े वित्तीय खेल का खुलासा हुआ है। रायपुर नगर निगम में टैंकरों के जरिए पानी वितरण के ठेके में भारी वित्तीय अनियमितता और भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने दस्तावेजों के साथ दावा किया है कि नगर निगम ने पिछले दो वर्षों में महज 1.50 करोड़ रुपये के टेंडर के बदले 3.73 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया। यह सीधे तौर पर जनता की गाढ़ी कमाई की बंदरबांट और सरकारी खजाने में करीब 2.23 करोड़ रुपये की चपत का मामला है।
इस पूरे घोटाले की पटकथा बेहद दिलचस्प है। आरोप है कि, मेसर्स केशव प्रसाद पांडेय, प्रज्ञा कंस्ट्रक्शन और रफीक अहमद समेत कुल 6 ठेका कंपनियों ने एक ही समय पर टेंडर भरे और हैरानी की बात यह है कि, सभी के ‘रेट’ भी एक समान थे। इसे महज संयोग नहीं बल्कि एक सोची-समझी साजिश और ‘सिंडिकेट’ का नतीजा बताया जा रहा है। साल 2025 में 1 करोड़ के ठेके के विरुद्ध 2.05 करोड़ का भुगतान हुआ, तो वहीं 2024 में 50 लाख के टेंडर में 1.68 करोड़ रुपये लुटा दिए गए। शहर के अलग-अलग जोनों में टैंकरों की संख्या और भुगतान के आंकड़ों में जमीन-आसमान का अंतर अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत की ओर साफ इशारा कर रहा है।

एक तरफ शहर की प्यासी जनता पानी के लिए प्रदर्शन कर रही है, वहीं दूसरी ओर कागजों पर फर्जी टैंकर चलाकर करोड़ों का भुगतान किया जा रहा है। नेता प्रतिपक्ष ने मांग की है कि, इस सिंडिकेट की उच्च स्तरीय जांच हो और दोषियों से अतिरिक्त राशि की रिकवरी की जाए। इस मामले पर महापौर मीनल चौबे ने जांच और दस्तावेजों के सत्यापन का भरोसा दिया है, लेकिन विपक्ष ने साफ चेतावनी दी है कि, यदि कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो मामला कोर्ट तक जाएगा।
