नई दिल्ली। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की उबलती कीमतों और पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध के तनाव ने भारत में ईंधन की कीमतों को लेकर खतरे की घंटी बजा दी है। कोटक सिक्योरिटीज के कमोडिटी एक्सपर्ट अनिंद्य बनर्जी के अनुसार, आने वाले दिनों में आम उपभोक्ताओं की जेब पर बड़ा बोझ पड़ सकता है। अनुमान है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 5 से 7 रुपये प्रति लीटर तक का तगड़ा इजाफा हो सकता है। इतना ही नहीं, रसोई गैस (LPG) और CNG की कीमतों में भी बढ़ोतरी की पूरी संभावना है।
अब तक सरकार और तेल कंपनियों (OMCs) ने एक्साइज ड्यूटी में कटौती और ‘अंडर-रिकवरी’ (नुकसान) झेलकर आम जनता को राहत देने की कोशिश की है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय दबाव अब बर्दाश्त से बाहर होता जा रहा है। कच्चा तेल ऊंचे दामों पर खरीदने के बावजूद कंपनियां इसे पुरानी दरों पर बेच रही हैं, जिससे उन पर भारी आर्थिक बोझ बढ़ गया है। जानकारों का मानना है कि अब इस बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा आम जनता के कंधों पर डालना सरकार की मजबूरी बन सकती है।

मौजूदा संकट की सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में अमेरिका, ईरान और इजराइल के बीच जारी तनाव है, जिसने तेल की सप्लाई चेन और शिपिंग रूट को बुरी तरह प्रभावित किया है। यह संकट कितना लंबा खिंचेगा, इसका अंदाजा लगाना फिलहाल मुश्किल है। सरकार के सामने इस वक्त सबसे बड़ी चुनौती महंगाई को काबू में रखने की है, क्योंकि ईंधन महंगा होने से परिवहन और कृषि लागत बढ़ेगी, जिसका सीधा असर रोजमर्रा की चीजों के दामों पर पड़ेगा। फिलहाल, बाजार और आम आदमी दोनों की नजरें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं।
