नई दिल्ली। देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) में अब लंबित मुकदमों के बोझ से दबे आम नागरिकों को बड़ी राहत मिलने वाली है। मोदी कैबिनेट के एक ऐतिहासिक प्रस्ताव को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपनी मंजूरी दे दी है। इस फैसले के तहत सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अध्यादेश, 2026 जारी किया गया है, जिससे चीफ जस्टिस (CJI) के अलावा जजों की संख्या 33 से बढ़कर 37 हो गई है। यानी अब सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश सहित कुल 38 जज होंगे। इससे पहले साल 2019 में यह संख्या बढ़ाई गई थी।
देश के केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट में मुकदमों की बढ़ती संख्या और न्यायिक कार्यभार को देखते हुए यह कदम बेहद जरूरी था। इस फैसले का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि अतिरिक्त जजों की नियुक्ति से सालों से लंबित पड़े मामलों का त्वरित निपटारा हो सकेगा। इसके साथ ही, जजों की संख्या बढ़ने से बड़ी संवैधानिक पीठों (Constitutional Benches) का गठन आसानी से हो सकेगा, जिससे देश के महत्वपूर्ण नीतिगत और कानूनी फैसलों में बेवजह देरी नहीं होगी।
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह सहित पूरे कानूनी समुदाय ने इस फैसले का स्वागत किया है। जानकारों का मानना है कि कोर्ट की नई इमारत का एक हिस्सा इस साल के अंत तक तैयार हो जाएगा, जहाँ इन सभी 38 जजों को आसानी से समायोजित किया जा सकेगा। विशेषज्ञों के मुताबिक, भविष्य की जरूरतों को देखते हुए आने वाले समय में जजों की संख्या 50 तक भी बढ़ानी पड़ सकती है। निश्चित तौर पर, सरकार का यह कदम भारतीय न्याय व्यवस्था को सुदृढ़ और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।
