आस्था, इतिहास और स्वाभिमान का संगम: डीपाडीह में 11 मई को सजेगा ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’

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रायपुर। हजार वर्षों की अटूट आस्था, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रीय स्वाभिमान के प्रतीक “सोमनाथ स्वाभिमान पर्व” के अंतर्गत बलरामपुर जिले का ऐतिहासिक स्थल डीपाडीह सामंत सरना 11 मई 2026 को एक विशेष आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन का साक्षी बनेगा। छत्तीसगढ़ शासन के संस्कृति विभाग के निर्देशानुसार 11 जनवरी 2026 से 11 जनवरी 2027 तक मनाए जा रहे इस राष्ट्रव्यापी स्मरणोत्सव का उद्देश्य देश की समृद्ध ऐतिहासिक विरासत और आस्था के अमर प्रतीकों को जन-जन से जोड़ना है।

प्राचीन स्थापत्य, पुरातात्विक महत्व और आदिवासी सांस्कृतिक धरोहर से समृद्ध डीपाडीह में आयोजित यह कार्यक्रम अतीत की गौरवगाथाओं को वर्तमान से जोड़ते हुए नई पीढ़ी में सांस्कृतिक जागरूकता और स्वाभिमान की भावना को सशक्त करेगा। यह आयोजन न केवल श्रद्धा का उत्सव होगा, बल्कि अपनी जड़ों से जुड़ने और इतिहास को आत्मसात करने का अवसर भी प्रदान करेगा। कलेक्टर के निर्देश एवं जिला पंचायत सीईओ के मार्गदर्शन में कार्यक्रम की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। आयोजन को सुव्यवस्थित एवं प्रभावी बनाने के लिए जिला प्रशासन द्वारा व्यापक स्तर पर समन्वय स्थापित किया गया है।

कार्यक्रम के सफल संचालन हेतु अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) शंकरगढ़ अनमोल विवेक टोप्पो को नोडल अधिकारी तथा जनपद पंचायत सीईओ वेद प्रकाश पांडे को सहायक नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। टेंट, साउंड, बैठक व्यवस्था, पेयजल सहित मूलभूत सुविधाओं की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों को सौंपी गई है।निर्बाध विद्युत आपूर्ति के लिए विद्युत विभाग, स्वास्थ्य सेवाओं हेतु चिकित्सा दल, तथा मंचीय एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के संचालन के लिए शिक्षा विभाग को जिम्मेदारी दी गई है। आदिवासी विकास विभाग द्वारा स्थानीय सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रदर्शन किया जाएगा, जबकि एनआरएलएम के माध्यम से स्व-सहायता समूहों के उत्पादों की प्रदर्शनी भी आकर्षण का केंद्र बनेगी।

कार्यक्रम का सीधा प्रसारण सुनिश्चित किया गया है, जिससे अधिक से अधिक लोग इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बन सकेंगे । ग्राम पंचायत स्तर पर व्यापक प्रचार-प्रसार कर जनभागीदारी को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। यह आयोजन आस्था और इतिहास के संगम के रूप में न केवल जिले की सांस्कृतिक पहचान को सुदृढ़ करेगा, बल्कि समाज में एकता, गौरव और अपने अतीत के प्रति सम्मान की भावना को भी नई ऊर्जा प्रदान करेगा।