दुर्ग। छत्तीसगढ़ में मासूम बच्चों के खिलाफ बढ़ते जघन्य अपराधों ने एक बार फिर कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दुर्ग जिले में हाल ही में हुई घटना ने इंसानियत को झकझोर दिया, जहां एक नाबालिग बच्ची का अपहरण कर उसके साथ दुष्कर्म किया गया और बाद में उसे बोरे में भरकर फेंक दिया गया। यह घटना प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था की भयावह तस्वीर सामने लाती है।इस घटना की सनसनी अभी थमी भी नहीं थी कि महज दो दिनों के भीतर बीजापुर से एक और दिल दहला देने वाला मामला सामने आया, जहां एक नाबालिग बच्ची के साथ पांच लोगों द्वारा सामूहिक दुष्कर्म किया गया।
प्रदेश के वरिष्ठ नेता एवं दुर्ग शहर से विधायक रहे अरुण वोरा ने इन घटनाओं पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि, “अब हालात ऐसे हो गए हैं कि, हर दिन बच्चों के खिलाफ अपराध की खबर सुनने को मिल रही है। अपराधियों के निशाने पर सीधे मासूम बच्चे हैं।”उन्होंने कहा कि, सबसे चिंताजनक और दुखद पहलू यह है कि, ज्यादातर मामलों में आरोपी कोई परिचित, पड़ोसी या घर-परिवार से जुड़ा व्यक्ति ही होता है, जिससे समाज में भरोसा लगातार टूट रहा है। वोरा ने कहा, “प्रदेश में POCSO मामलों में लगातार तेजी से वृद्धि हो रही है। कड़े कानून के बावजूद अपराधियों में कोई भय नहीं है। मासूम बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में व्यवस्था पूरी तरह विफल नजर आ रही है।”

उन्होंने आरोप लगाया कि, लगातार हो रही ऐसी घटनाएं इस बात का संकेत हैं कि, प्रदेश में कानून का राज कमजोर पड़ चुका है और अपराधी बेखौफ हैं।वोरा – “ऐसे जघन्य अपराधों में शामिल दोषियों को त्वरित और कड़ी सजा मिलनी ही चाहिए, ताकि अपराधियों में कानून का भय स्थापित हो और भविष्य में ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सके।” वोरा ने एक और गंभीर मुद्दा उठाते हुए कहा कि, हाल के समय में बच्चों के बीच आत्महत्या के मामलों में भी तेजी से वृद्धि हुई है, जहां छोटी-छोटी बातों पर बच्चे अपनी जान दे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि,स्कूलों में काउंसलिंग और मानसिक स्वास्थ्य व्यवस्था अनिवार्य की जाए,अभिभावक बच्चों के साथ खुला संवाद बनाए रखें,ऐसे मामलों में फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए सख्त सजा सुनिश्चित हो ,ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके और समाज में एक सख्त संदेश जाए।प्रशासन द्वारा निगरानी और जागरूकता अभियान मजबूत किए जाएंअंत में उन्होंने कहा कि “अब समय आ गया है कि सरकार बयानबाजी से आगे बढ़कर ठोस और सख्त कार्रवाई करे, वरना मासूमों की सुरक्षा खतरे में ही बनी रहेगी।”
