वॉशिंगटन। पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के चलते संकट गहराता जा रहा है। बीते दिनों इस्लामाबाद में हुई शांति वार्ता के असफल होने के बाद हालात और अधिक जटिल हो गए हैं, जिससे वैश्विक चिंता बढ़ गई है। हालांकि अब एक बार फिर दोनों देशों के बीच नई बातचीत की संभावना जताई जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछली विफलता के बावजूद कूटनीतिक चैनल सक्रिय हैं और अगली शांति वार्ता की तैयारी तेज हो गई है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या यह नया प्रयास तनाव को कम कर पाएगा या टकराव और बढ़ेगा? आपको बता दें की रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों देश इस हफ्ते के अंत तक फिर से आमने-सामने बैठ सकते हैं। यह बातचीत उस दो हफ्ते के अस्थायी युद्धविराम (सीजफायर) से पहले हो सकती है, जो 21 अप्रैल को खत्म होने वाला है।रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगली बातचीत के लिए जिनेवा को सबसे संभावित जगह माना जा रहा है। हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि पिछली बार जैसी ही उच्च स्तरीय टीम इसमें शामिल होगी या नहीं।
वहीं अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि अगर उन्हें लगेगा कि ईरान उनकी शर्तों को मानने के लिए तैयार है, तो वह जल्द ही फिर से आमने-सामने बातचीत के लिए तैयार हैं। सूत्रों के मुताबिक, दोनों देश पिछले छह हफ्तों से जारी तनाव को खत्म करने और समझौता करने की कोशिश में लगे हुए हैं। हालांकि पिछली बातचीत में कोई नतीजा नहीं निकला था, लेकिन अब फिर से बातचीत को लेकर सहमति बनने की बात सामने आई है। इससे पहले सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के साथ बातचीत को लेकर बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि वार्ता असफल होने के बाद अब ईरान ने फिर से अमेरिका से संपर्क किया है और वह समझौता करना चाहता है। ट्रंप ने अपने पोस्ट में इस बात पर जोर दिया कि ईरान अमेरिका से बातचीत करने के लिए बेचैन है। उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा तनाव मुख्य रूप से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर है। ट्रंप ने साफ कहा कि अमेरिका कभी भी ईरान को परमाणु हथियार बनाने की अनुमति नहीं देगा।
