बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के सबसे चर्चित सीजीपीएससी (CGPSC) 2003 भर्ती घोटाले में एक नया और अहम मोड़ आ गया है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा आयोजित विशेष लोक अदालत के जरिए इस सालों पुराने विवाद को आपसी सहमति से सुलझाने की पहल की गई, लेकिन मुख्य याचिकाकर्ता वर्षा डोंगरे ने समझौते के किसी भी प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है। वर्षा डोंगरे का स्पष्ट कहना है कि भ्रष्टाचार के इस मामले में अब जो भी फैसला होगा, वह सुप्रीम कोर्ट की बेंच से ही होगा, समझौते की कोई गुंजाइश नहीं है।
आपको बता दें कि, वर्षा डोंगरे की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद साल 2017 में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने इस भर्ती में बड़े पैमाने पर धांधली और भ्रष्टाचार की पुष्टि की थी। कोर्ट ने उत्तर पुस्तिकाओं में अंकों की हेराफेरी और नियमों के उल्लंघन को सही पाया था और पूरी चयन सूची को संशोधित करने का ऐतिहासिक आदेश दिया था। हालांकि, प्रभावित अधिकारियों ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, जिसके बाद हाईकोर्ट के आदेश पर रोक (Stay) लगा दी गई थी। वर्तमान में मुंगेली और कबीरधाम जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों के माध्यम से संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर सुलह के लिए बुलाया गया था।
एसीबी की जांच और हाईकोर्ट के पिछले रिकॉर्ड के मुताबिक, इस घोटाले में 52 ऐसे उम्मीदवार शामिल थे जो इंटरव्यू के लिए पात्र ही नहीं थे, फिर भी उनका चयन कर लिया गया। वहीं, 17 योग्य उम्मीदवार चयन सूची से बाहर रह गए थे। यदि मेरिट सूची दोबारा बनती है, तो दो दर्जन से अधिक रसूखदार अधिकारी प्रभावित होंगे, जिनमें से कई आज आईएएस (IAS) पद तक पहुंच चुके हैं। वर्षा डोंगरे ने साफ किया है कि हाईकोर्ट ने पहले ही उनके पक्ष में फैसला दिया था और राज्य सरकार को इसे लागू करना चाहिए था, न कि रसूखदारों को बचाने के लिए मामला लंबित रखना चाहिए था। अब सबकी नजरें सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले पर टिकी हैं।
