राम का नाम बदनाम कर रहे-गिरीश पंकज

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बहुत पहले एक फिल्मी गीत आया था, देखो ओ दीवानो तुम ये काम न करो /राम का नाम बदनाम न करो. हम बचपन से एक कहावत भी सुनते आए हैं ‘राम नाम जपना पराया माल अपनाÓ. यह कहावत देश के बड़े-बड़े  मंदिरों में चरितार्थ होते हुए दिखाई देती है. जितने भी बड़े मंदिर हैं, वहां लाखों-करोड़ों का चढ़ावा आता है और मंदिर से जुड़े अनेक लोग मालामाल हो जाते हैं.दुर्भाग्य की बात यह है कि ईश्वर की मूर्ति के नीचे ऐसे अपराध होते हैं.अपराध करने वाले शायद इस आत्मविश्वास के साथ भरे होते हैं कि ऊपर वाला उनका कुछ बिगाड़ नहीं सकेगा. वह निर्भय होकर घोटाला करते हैं, यानी ईश्वर के भक्त गण जो चढ़ावा चढ़ाते हैं, उसका एक हिस्सा ये सफेदपोश चोर हड़प लेते हैं. अयोध्या के राम मंदिर में देश भर के लाखों श्रद्धालु पहुंच रहे हैं और वहां करोड़ का चंदा एकत्र होता रहा है. और इसमें दो राय नहीं कि जब से राम मंदिर बना है उससे जुड़े कुछ लोग मालामाल तो हुए ही हैं. चंदा गिनने वाले  मिश्रा के घर से करीब दस लाख नकद बरामद हुए, जिसमें से कुछ रकम तो चंदा चोर ने घर के बाहर गोबर के ढेर में छिपाकर रखी थी. ऐसे ही? तिन्नू यादव का नाम सामने आया है, जो पहले अयोध्या में ऑटो चलाता था. जांच हुई तो पता चला कि उसके पास अयोध्या और लखनऊ में लगभग पचास करोड़ की अघोषित संपत्ति है. इसमें 70 कमरों का हॉस्टल, है, एक रेस्टोरेंट में हिस्सेदारी और कुछ लग्जरी गाडिय़ां है। अचानक राम जी ने इस  बंदे पर इतनी ‘कृपाÓ कैसे बरसा दी? ऐसे और कुछ लोग हैं जो राम मंदिर से जुड़े रहने के बाद रातों-रात लखपति हो गए. और भी कुछ लोगों के बारे में पता चला है कि उन्होंने इस बीच अयोध्या और आसपास लाखों रुपए की जमीन खरीदी है. अब जब मंदिर के चंदा की चोरी का मामला सामने आया है, तब जांच कमेटी भी गठित कर दी गई है. तब उम्मीद की जाती है कि चंदा चोर पकड़ में आएंगे. और यह भी हो सकता है कि अंतत: लीपापोती करके मामले को रफ़ा-दफा भी कर दिया जाए. लेकिन इसमें दो राय नहीं कि करोड़ों की चोरी तो हुई है.  लोगों की मांग मांग पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक जांच कमेटी गठित कर दी है जिसमें कुछ पुलिस के बड़े अधिकारी शामिल किए गए हैं.  उम्मीद की जानी चाहिए की एसआईटी जल्द ही अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत कर देगी. कड़े सुरक्षा उपाय ज़रूरी- अब भविष्य में  चोरियों को रोकने के लिए कड़े उपाय करने की जरूरत है.सबसे पहले उपाय तो यही है यही है कि राम मंदिर के कोने -कोने में और अधिक खुफिया कैमरे लगाए जाएं. राम मंदिर में काम करने वाले तमाम छोटे-बड़े अधिकारियों की प्रवेश के समय और वापसी के समय तलाशी ली जाए. भले ही वह सामान्य कर्मचारी हो या ट्रस्ट का कोई बड़ा पदाधिकारी. ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारी आगे बढ़ कर अपनी तलाशी दें. यह नैतिकता कहती है कि उन्हें ऐसा करना चाहिए. ऐसा करने से एक पारदर्शिता बनेगी और उन पर भी कोई उंगली नहीं उठेगी. इसमें दो राय नहीं कि देशभर से आने वाले चढ़ावे के कारण कुछ लोगों की नीयत नाग -नागिन की तरह डोल जाए और मन-ही-मन हुए गुनगुनाने लगे कि ‘राम नाम जपना पराया माल अपनाÓ. कई बार चढ़ावा चोर सोचते हों कि कौन देखता है. अपनी सुविधा से देर रात को खुफिया कैमरे भी बंद कर दिए जाएं और उसे समय वारा-न्यारा हो जाए. इसलिए अब यह व्यवस्था होनी चाहिए की 24 घंटे खुफिया कैमरे चालू रहेंगे ताकि हर एक गतिविधि रिकॉर्ड होती रहे. अब लोग ऊपर वाले से नहीं डरते क्योंकि बहुतों को यह विश्वास है कि ऊपर वाला जैसी कोई चीज होती नहीं है. यही कारण है कि मंदिर में चोरियां होती हैं,मंदिर में बलात्कार भी हो जाते हैं. लेकिन अब लोग केवल खुफिया कैमरे से डरते हैं कि अगर उनकी हरकतें कमरे में रिकॉर्ड हो गई, तो सबूत के रूप तौर पर इसे प्रस्तुत किया जा सकता है.इसलिए कैमरे आने के बाद अपराधी भी बहुत सावधान हो गए हैं.वह चेहरे पर नकाब लगाकर अपराध करते हैं. यही कारण है कि राम मंदिर में बहुत सारे वीडियो मिटा दिए गए हैं. ताकि अपराधी पकड़े ही ना जा सके. यह भी एक गंभीर मामला है कि सीसीटीवी कैमरे की रिकॉर्डिंग को मिटा दिया जाए.इसका मतलब है कि घोटालेबाज पकड़ में ही न आएँ. ऐसा ही खेल हुआ है इसलिए ऐसा करने वाले अपराधियों कोकठोर दंड मिलना चाहिए.