#editorial

जो सभी का है वो किसी का नहीं-डॉ. माणिक विश्वकर्मा

महान यूनानी दार्शनिक अरस्तू ने कहा है कि जो सबका मित्र है वह किसी का मित्र नहीं होता। यह एक ऐसा गूढ़ और शाश्वत विचार है जो सामाजिक, आर्थिक, मनोवैज्ञानिक…
October 18, 2026

बस का बढ़ा किराया!- गिरीश पंकज

छत्तीसगढ़ के बस मालिकों ने आम यात्रियों पर अभी जो बोझ डाला है, वह विस्मयदेह चिंतित कर देने वाला है. बस किराए में पचहत्तर प्रतिशत वृद्धि करना बड़ा अत्याचार है.…
October 17, 2026

भारत की बैंकिंग व्यवस्था पर उठते सवाल…!-संजय सक्सेना

किसी देश की आर्थिक ताकत का आकलन केवल उसकी जीडीपी की वृद्धि, शेयर बाजार की चमक या बैंकों के बढ़ते मुनाफे से नहीं किया जा सकता। असली कसौटी यह है…
October 14, 2026

अविस्मरणीय रहेंगे ‘नाना’…:गिरीश पंकज

सामाजिक विसंगतियों पर ‘प्रहार’ और ‘अंकुश’ लगा कर ‘तिरंगा’ फहराने वाला फिल्मों का ‘क्रांतिवीर’- ‘परिंदा’ अब उस पार बहुत दूर चला गया है, लेकिन वह अविस्मरणीय ही रहेगा। नाना पाटेकर…
October 10, 2026

मुद्द्या ए रोजगार…. बदल रहा है नौकरी का बाजार-संजय सक्सेना

जहां सिर्फ डिग्री और सामान्य योग्यता के आधार पर रोजगार हासिल करना लगातार मुश्किल होता जा रहा है। कंपनियां अब बड़ी संख्या में कर्मचारियों की भर्ती करने के बजाय ऐसे…
October 6, 2026

यात्रा के रूप एवं रंग- डॉ. माणिक विश्वकर्मा

यात्रा जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इससे मानसिक शांति मिलती है एवं तनाव कम होता है। नये अनुभव एवं व्यक्तिगत विकास के साथ विभिन्न लोगों से मिलने तथा उनके रहन-सहन…
October 4, 2026

चुनाव आयोग पर घमासान- संजय सक्सेना

देश की महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्था चुनाव आयोग को लेकर इस समय घमासान मचा हुआ है। आयोग की कार्यप्रणाली और खासकर उसके द्वारा चलाए गए एसआइआर अभियान पर विपक्ष तो लंबे…
September 30, 2026