1.13 करोड़ की निवेश धोखाधड़ी का पर्दाफाश: पुलिस ने नागपुर से 2 अंतरराज्यीय महिला आरोपियों को किया गिरफ्तार

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रायपुर। रायपुर कमिश्नरेट की एण्टी क्राइम एण्ड साइबर यूनिट और थाना तेलीबांधा पुलिस ने निवेश के नाम पर की गई 1.13 करोड़ रुपये की बड़ी धोखाधड़ी का खुलासा करते हुए गिरोह की 2 महिला आरोपियों को महाराष्ट्र के नागपुर से गिरफ्तार किया है। आरोपी महिलाओं पर देशभर में करोड़ों की ठगी करने और लगभग 15 वर्षों से निवेश धोखाधड़ी को अंजाम देने का आरोप है। पुलिस उपायुक्त क्राइम एवं साइबर स्मृतिक राजनाला और पुलिस उपायुक्त मध्य जोन तारकेश्वर पटेल के निर्देशन में हुई इस संयुक्त कार्यवाही में प्रार्थी उमेश कुमार सिन्हा से निवेश और फंड दिलाने के नाम पर सुनियोजित ठगी की गई थी। आरोपियों ने खुद को प्रभावशाली लोगों और विदेशी निवेशकों से जुड़ा बताकर प्रार्थी को विश्वास में लिया और नकली केमिकल से काले नोटों को असली में बदलने का झूठा प्रदर्शन कर विभिन्न बहानों से 1 करोड़ 13 लाख रुपये हड़प लिए। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान कनिज फातमा उर्फ भावना पांडेय निवासी कोलकाता और दीपिका पालीवाल निवासी उदयपुर के रूप में हुई है। प्रारंभिक पूछताछ में दोनों ने नागपुर, लखनऊ सहित कई राज्यों में इसी तरह की ठगी करना स्वीकार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 3 मोबाइल, 26,000 रुपये नगद, एटीएम कार्ड और आधार कार्ड भी जब्त किए हैं। थाना तेलीबांधा में अपराध क्रमांक 330/26 धारा 318(4), 61(2) बीएनएस के तहत मामला दर्ज कर गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है।

कैसे दी ठगी को अंजाम
प्रार्थी उमेश कुमार सिन्हा सालिक ग्रीन रिन्यूएबल एनर्जी प्रा. लि. के डायरेक्टर हैं। कंपनी विस्तार के लिए 45 करोड़ के निवेश की जरूरत पर उनकी मुलाकात राकेश कौशिक के जरिए दीपक सिंह, अभिषेक सिंह और अन्य से हुई। आरोपियों ने निवेश कराने का झांसा देकर प्रार्थी को चेन्नई और नागपुर बुलाया। वहां नकली केमिकल, काले नोटों को असली बनाने का प्रदर्शन, विदेशी तकनीक और बड़े अधिकारियों से बैठक का दिखावा कर विश्वास जमाया। इसके बाद विदेशी परीक्षण, हाई-पावर केमिकल, सुरक्षा स्वीकृति और फाइल प्रोसेसिंग के नाम पर बार-बार पैसे मांगे गए। इसी तरह विभिन्न किश्तों में कुल 1,13,00,000 रुपये की ठगी की गई।

गिरोह के फरार सदस्यों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की दबिश जारी

आरोपी ने निवेश पद्धति का इस्तेमाल करते थे। पहले से तैयार असली नोटों से नकली केमिकल प्रक्रिया का प्रदर्शन कर पीड़ित को भरोसा दिलाया जाता था कि काले रंग के नोट विशेष केमिकल से असली बन जाएंगे। फिर केमिकल, परीक्षण और अनुमति के नाम पर लगातार रकम ऐंठी जाती थी। तकनीकी विश्लेषण और बैंक खातों की जांच के बाद दोनों महिला आरोपियों को नागपुर में ट्रेस किया गया। दबिश देकर उन्हें हिरासत में लिया गया। उनके पास से 03 मोबाइल फोन, 26,000 रुपये नगद, एटीएम कार्ड और आधार कार्ड जब्त किए गए हैं। बरामद सामग्री की कुल कीमत लगभग 70,000 रुपये है। पुलिस के अनुसार आरोपी पिछले 15 वर्षों से सक्रिय हैं और नागपुर, लखनऊ सहित कई राज्यों में ठगी कर चुके हैं। अन्य राज्यों की पुलिस से समन्वय कर आगे की वैधानिक कार्यवाही की जा रही है। गिरोह के फरार सदस्यों की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है।