शेयर बाजार में हाहाकार: दुनिया की ‘टॉप 100’ कंपनियों से बाहर हुए सभी भारतीय दिग्गज, जानिए क्यों डूब रहा है मार्केट

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नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में जारी चौतरफा बिकवाली ने देश के कॉर्पोरेट जगत को ऐतिहासिक झटका दिया है। लगातार आ रही गिरावट के कारण इतिहास में पहली बार दुनिया की शीर्ष 100 सबसे मूल्यवान कंपनियों की सूची से सभी भारतीय कंपनियां बाहर हो गई हैं। साल 2025 की शुरुआत तक इस लिस्ट में दबदबा रखने वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) फिसलकर 106वें, एचडीएफसी बैंक 190वें और भारती एयरटेल 202वें स्थान पर आ गए हैं। सबसे बड़ा नुकसान आईटी सेक्टर को हुआ है, जहां टीसीएस (TCS) सीधे 314वें और इंफोसिस खिसककर 590वें पायदान पर जा पहुंची हैं। इस मंदी से भारत का ‘100 बिलियन डॉलर क्लब’ भी आधा रह गया है और अब केवल रिलायंस, एचडीएफसी और एयरटेल ही इस क्लब में बचे हैं।

बाजार के इस तरह धराशायी होने के पीछे तीन बड़े वैश्विक कारण हैं:

मिडिल-ईस्ट संकट और महंगा क्रूड: अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव से कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई हैं। अपनी जरूरत का 80% तेल आयात करने वाले भारत के लिए इससे महंगाई और राजकोषीय घाटा बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है।

यूएस बॉन्ड यील्ड में उछाल: अमेरिका में 10-साल की बॉन्ड यील्ड बढ़कर 4.6% होने से विदेशी निवेशक (FIIs) भारतीय बाजार से लगातार पैसा निकालकर अमेरिकी बाजारों में शिफ्ट कर रहे हैं।

ग्लोबल डाउनग्रेड की बाढ़: यूबीएस, मॉर्गन स्टेनली, जेपी मॉर्गन और गोल्डमैन सैश जैसी दिग्गज वैश्विक ब्रोकरेज एजेंसियों ने भारतीय बाजार की रेटिंग घटा दी है, जिससे निवेशकों का भरोसा डगमगा गया है।

जहां भारतीय कंपनियां अपनी रैंकिंग गंवा रही हैं, वहीं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के दम पर अमेरिकी टेक दिग्गज दुनिया पर राज कर रहे हैं। इस समय एनवीडिया (Nvidia) 5.33 ट्रिलियन डॉलर के मार्केट कैप के साथ दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनी बनी हुई है, जिसके बाद अल्फाबेट और एप्पल का नंबर आता है।