अफगानिस्तान में पाकिस्तानी बमबारी, 3 की मौत, तालिबान का कड़ा रुख

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कुनार। अफगानिस्तान के उत्तर-पूर्वी कुनार प्रांत को निशाना बनाकर किए गए पाकिस्तानी हवाई हमले में कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई। वहीं, कई अन्य घायल हो गए। यह जानकारी टोलो न्यूज ने सोमवार को एक प्रांतीय अधिकारी के हवाले से दी गई है।

यह हमला क्यों किया गया है?:
माना जा रहा है कि यह सैन्य हमला उत्तर-पश्चिमी पाकिस्तान में एक पुलिस स्टेशन परिसर में हुए आत्मघाती बम धमाके के जवाब में किया गया है। इससे यह आशंका बढ़ गई है कि पड़ोसी देशों के बीच तनाव एक बार फिर खुली लड़ाई में बदल सकता है।

क्या है पूरा मामला?:
दरअसल, फरवरी में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच कई वर्षों में सबसे गंभीर सैन्य टकराव हुआ। यह ताजा तनाव उस चेतावनी के कुछ दिनों बाद बढ़ा है जिसमें तालिबान ने कहा था कि वह किसी भी पाकिस्तानी सैन्य कार्रवाई के खिलाफ अफगान क्षेत्र की रक्षा करेगा।

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तालिबान ने क्या चेतावनी दी थी?:
पाकिस्तान के संभावित हमलों से पहले, तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने इस्लामाबाद को चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा कि वह अफगानिस्तान के अंदर हमले न करे। उन्होंने कहा कि अगर अफगानिस्तान की जमीन पर हमला हुआ, तो काबुल सैन्य जवाब देगा।

मुजाहिद ने किन आरोपों को खारिज किया?:
अल अरबिया इंग्लिश को दिए एक इंटरव्यू में, मुजाहिद ने पाकिस्तान के उन आरोपों को खारिज कर दिया कि अफगानिस्तान में मौजूद चरमपंथी गुट पाकिस्तान के खिलाफ हमले करने के लिए लोगों की भर्ती करते हैं। उन्हें ट्रेनिंग देते हैं और हमले शुरू करते हैं।

मुजाहिद ने क्या कहा?:
मुजाहिद ने कहा, ‘अगर पाकिस्तान अफगानिस्तान की जमीन की पवित्रता का उल्लंघन करने के लिए आर्टिकल 51 का इस्तेमाल करता है, तो अफगानिस्तान को अपने देश की रक्षा करने का अधिकार है, और हम ऐसा करेंगे।’ उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान के अंदर कोई भी पाकिस्तानी सैन्य अभियान अफगान संप्रभुता का उल्लंघन होगा और काबुल की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया हो सकती है।

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टीटीपी पर क्या बोले मुजाहिद ?:
इसके साथ ही मुजाहिद ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि तालिबान प्रशासन ‘तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान’ (टीटीपी) को अफगान धरती से काम करने की इजाजत नहीं देता है। उन्होंने इस बात से भी इनकार किया कि तालिबान सरकार दूसरे देशों पर हमले करने वाले हथियारबंद समूहों का समर्थन करती है। इसके बजाय, मुजाहिद ने कहा कि पाकिस्तान को अपनी आंतरिक सुरक्षा समस्याओं पर गौर करना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि टीटीपी और बलूच हथियारबंद समूहों से जुड़ी हिंसा 2021 में तालिबान के सत्ता में लौटने से पहले से ही मौजूद थी। पाकिस्तान ने बार-बार आरोप लगाया है कि चरमपंथी समूह अफगानिस्तान से काम कर रहे हैं और उसने काबुल पर उनके खिलाफ कार्रवाई करने का दबाव डाला है। तालिबान ने लगातार इस बात से इनकार किया है कि उसने अफगान क्षेत्र का इस्तेमाल पाकिस्तान के खिलाफ हमलों के लिए होने दिया है।

अफगानिस्तान बातचीत के लिए तैयार है?:
सैन्य जवाबी कार्रवाई की चेतावनी के बावजूद, मुजाहिद ने कहा कि काबुल अभी भी इस्लामाबाद के साथ बातचीत करने को तैयार है। उन्होंने दोनों देशों की सीमा पर सुरक्षा चिंताओं को दूर करने के लिए बेहतर इंटेलिजेंस-शेयरिंग व्यवस्था और ज्यादा आपसी सहयोग की बात कही। मुजाहिद ने सऊदी अरब की संभावित मध्यस्थता भूमिका का भी समर्थन किया। उन्होंने कहा कि रियाद के अफगानिस्तान और पाकिस्तान दोनों के साथ अच्छे संबंध हैं। वह दोनों पक्षों के मतभेदों को सुलझाने में मदद कर सकता है। साझा सीमा पर चरमपंथी गतिविधियों के कारण काबुल और इस्लामाबाद के संबंध तनावपूर्ण रहे हैं।

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