“पेपर नहीं लीक हो रहे, युवाओं के सपने लीक हो रहे हैं।” अरुण वोरा

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दुर्ग। वरिष्ठ कांग्रेस नेता अरुण वोरा ने देशभर में लगातार सामने आ रहे परीक्षा घोटालों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यह किसी एक परीक्षा का संकट नहीं, बल्कि पिछले वर्षों से लगातार विफल होती परीक्षा व्यवस्था की कहानी है।हर बार पेपर बदलता है, जांच एजेंसी बदलती है, लेकिन नहीं बदलती तो युवाओं के साथ होने वाली धोखाधड़ी।”वोरा ने कहा कि देश के लाखों युवाओं की मेहनत अब परीक्षा केंद्रों में नहीं, बल्कि लीक हुए प्रश्नपत्रों, संगठित गिरोहों और भ्रष्ट व्यवस्था के हवाले होती जा रही है। NEET-UG 2026 परीक्षा को रद्द करना पड़ा और 22 लाख से अधिक अभ्यर्थी दोबारा परीक्षा की अनिश्चितता में धकेल दिए गए। पूरे मामले की जांच CBI के हवाले है। लेकिन सवाल यह है कि हर बार जांच बाद में क्यों होती है और रोकथाम पहले क्यों नहीं?

उन्होंने कहा कि अभी देश NEET के झटके से उबर भी नहीं पाया था कि महाराष्ट्र शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) भी पेपर लीक की आशंका के कारण परीक्षा से ठीक पहले स्थगित करनी पड़ी।4.28 लाख से अधिक अभ्यर्थियों का भविष्य एक बार फिर अनिश्चितता में डाल दिया गया, तैयारी एक बार फिर प्रशासनिक विफलता की भेंट चढ़ गई।

उन्होंने कहा कि यह कोई अलग-थलग घटना नहीं है। देश में पिछले वर्षों में लगभग 90 प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक या परीक्षा संबंधी गंभीर अनियमितताओं के मामले सामने आ चुके हैं। कभी प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले बाजार में बिकते हैं, कभी फर्जी परीक्षार्थी पकड़े जाते हैं, कभी OMR शीट से छेड़छाड़ होती है तो कभी परिणामों में हेरफेर के आरोप लगते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने पेपर लीक रोकने के लिए कानून तो बनाए, लेकिन कानून अपराध के बाद लागू होता है, व्यवस्था अपराध होने से पहले रोकती है। आज भी कोई जवाब नहीं देता कि प्रश्नपत्र कहाँ तैयार होते हैं, उनकी सुरक्षा किसके जिम्मे होती है, प्रिंटिंग, परिवहन, मूल्यांकन और डिजिटल डेटा की निगरानी किस प्रक्रिया के तहत होती है। जब तक इन सवालों का पारदर्शी जवाब नहीं मिलेगा, तब तक हर साल वही क्रम दोहराया जाएगा—पेपर लीक, परीक्षा रद्द, जांच एजेंसी, गिरफ्तारी और फिर अगला घोटाला।

अरुण वोरा ने कहा कि “देश का युवा नौकरी नहीं मांग रहा, केवल ईमानदार परीक्षा मांग रहा है। लेकिन दुर्भाग्य यह है कि आज उसे अपनी मेहनत से ज्यादा व्यवस्था की ईमानदारी पर भरोसा करना पड़ रहा है, और वही भरोसा बार-बार टूट रहा है।हर पेपर लीक केवल प्रश्नपत्र नहीं चुराता, बल्कि लाखों युवाओं का समय, वर्षों की मेहनत, अवसर, विश्वास और भविष्य भी छीन लेता है। यदि यही स्थिति रही, तो “पेपर लीक” को देश का वार्षिक आयोजन घोषित कर देना चाहिए, क्योंकि आज समय पर यदि कुछ आयोजित होता है, तो वह परीक्षा नहीं, उसका लीक होना है।

उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि सभी राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए स्वतंत्र परीक्षा सुरक्षा प्राधिकरण, एंड-टू-एंड डिजिटल ऑडिट, थर्ड पार्टी सुरक्षा निगरानी तथा समयबद्ध जवाबदेही व्यवस्था लागू की जाए, ताकि देश के युवाओं का भविष्य हर साल किसी नए पेपर लीक की खबर का इंतजार न करे। देश का युवा निष्पक्ष और सुरक्षित परीक्षा व्यवस्था का हकदार है—उसके सपनों की यह संगठित चोरी अब हर हाल में बंद होनी चाहिए।