क्या फाइजर वैक्सीन से होता है हंटावायरस? जानें सोशल मीडिया पर वायरल दावे का पूरा सच

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नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर इन दिनों एक चौंकाने वाला दावा वायरल हो रहा है, जिसमें कहा जा रहा है कि, फाइजर (Pfizer) की COVID-19 वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स में ‘हंटावायरस पल्मोनरी इन्फेक्शन’ भी शामिल है। फेसबुक और X (ट्विटर) पर साझा किए गए कुछ स्क्रीनशॉट्स में फाइजर के एक पुराने दस्तावेज का हवाला देकर यह डर फैलाया जा रहा है कि वैक्सीन में ही यह खतरनाक वायरस मौजूद है।

क्या है इस दावे की असलियत?:
पड़ताल में यह दावा पूरी तरह भ्रामक और गलत पाया गया है। दरअसल, जिस दस्तावेज का जिक्र किया जा रहा है, वह फाइजर द्वारा 2021 में FDA को सौंपा गया एक सुरक्षा डेटा है। इस डेटा के अपेंडिक्स में ‘स्पेशल इंटरेस्ट के एडवर्स इवेंट्स’ की एक लंबी लिस्ट है। फाइजर के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया है कि इस लिस्ट में उन सभी बीमारियों या मेडिकल घटनाओं को दर्ज किया गया था, जो वैक्सीन लेने वाले व्यक्तियों को उस दौरान हुईं, चाहे उनका वैक्सीन से कोई लेना-देना हो या नहीं।

वैक्सीन में नहीं है कोई जीवित वायरस:
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और अमेरिका के नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ हेल्थ के अनुसार, हंटावायरस केवल चूहों के संपर्क में आने या संक्रमित व्यक्ति के बेहद करीब रहने से फैलता है। फाइजर की वैक्सीन (कॉमिरनेटी) की आधिकारिक सामग्री सूची में हंटावायरस का कोई जिक्र नहीं है। कंपनी की वेबसाइट के मुताबिक, इस वैक्सीन में कोई भी ‘जीवित वायरस’ इस्तेमाल नहीं किया गया है।

नतीजा:
ब्रिटेन और अन्य देशों की स्वास्थ्य एजेंसियों ने फाइजर वैक्सीन की गहन समीक्षा के बाद इसे सुरक्षित पाया है और उनके आधिकारिक ‘साइड इफेक्ट्स’ की सूची में हंटावायरस शामिल नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी रिपोर्टिंग सिस्टम (जैसे VAERS) में किसी बीमारी का नाम दर्ज होने का मतलब यह कतई नहीं है कि वह वैक्सीन के कारण ही हुई है। अतः वैक्सीन को हंटावायरस के लिए जिम्मेदार ठहराना वैज्ञानिक रूप से गलत है।