प्रदेश में अब भी लगभग 24 लाख बच्चे कुपोषित, बच्चों को सिर्फ 25 रुपए का पोषण, इसमें मिलेगा एक पाव दूध और 100 ग्राम दाल

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  • कुपोषण दूर करने एक बच्चे को रोजाना 25 रुपए का पोषण
  • गंभीर कुपोषित बच्चों की संख्या 2 लाख

रायपुर। ( तुमेश साहू ) प्रदेश में कुपोषण के खिलाफ सरकारें हर साल करोड़ों रुपये खर्च कर रही हैं। आंगनबाड़ी सेवाएं, पोषण अभियान, सक्षम आंगनबाड़ी एवं पोषण 2.0, टेक-होम राशन और पूरक पोषण जैसी योजनाओं पर लगातार फंड बढ़ रहा है। इसके बावजूद लाखों बच्चे आज भी कुपोषण से जूझ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार लाख कोशिशों के बाद भी प्रदेश कुपोषण से मुक्त नहीं हो पा रही है। छत्तीसगढ़ में तो हालत और ही खराब है। लाखों की संख्या में कम वजन के बच्चे सरकार के पोषण पर ही निर्भर हैं। सरकार कुपोषण दूर करने के लिए एक बच्चे को रोजाना 25 रुपए का पौष्टिक आहार दे रही है। अब इस राशि में तो एक पाव दूध, 100 ग्राम दाल या कुछ फल और सब्जी आ सकती है। जबकि कुपोषित बच्चे तो हर दिन निर्धारित मात्रा में प्रोटीन, विटामिन, मिनरल्स समेत सभी पोषक तत्वों से भरपूर खाना चाहिए। इस थाली की कीमत बाजार भाव के हिसाब से कम से कम 100 रुपए तक होगी। यह आंकलन हम सिर्फ पोषण आहार के फंड के आधार पर कर रहे हैं। केंद्र और राज्य सरकार के माध्यम से कुपोषण के लिए फंड आते हैं।


कुपोषण के खिलाफ हर साल हजारों करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। इसके बावजूद राज्य में लाखों बच्चे कम वजन, कम लंबाई और कुपोषण की समस्या से जूझ रहे हैं। ऐसे में बड़ा सवाल उठता है कि क्या योजनाओं का लाभ वास्तव में बच्चों तक उस रूप में पहुंच रहा है, जैसा कागजों में दिखाया जाता है। हालांकि यह भी देखना होगा कि कई सरकारी योजनाएँ पूरक पोषण देने के लिए होती हैं। पूरे दिन का भोजन उपलब्ध कराने के लिए नहीं। लेकिन यदि यही राशि बच्चे के पूरे दैनिक भोजन के लिए मानी जाए, तो संतुलित और विविध आहार उपलब्ध कराने के लिए काफी कम है। सवाल यह भी है कि क्या कुपोषण की पूरी राशि उन बच्चों तक पहुंचती है जिनको इनकी जरूरत है। क्योंकि यह राशि सिस्टम की जेब में भी चली जाती है।

एनएफएचएस 6 की ताजा रिपोर्ट के अनुसार

1. 5 साल तक की उम्र के हिसाब से छोटे कद बच्चों की संख्या 27.5 फीसदी है जो साल 2019-21 के 34.6 फीसदी से कम हुई है।

2. प्रदेश में कम लंबाई के बच्चों की संख्या 8.5 से 8.7 लाख है।

3. लंबाई के हिसाब से कम वजन के बच्चों की संख्या 21.1 फीसदी है जो साल 2019-21 के 18.9 फीसदी से बढ़ गई है।

4. लंबाई के हिसाब से कम वजन के बच्चों की संख्या 4.6 से 4.8 लाख है।

5. गंभीर कुपोषित बच्चों की संख्या 6.9 फीसदी है जो साल 2019-21 के 7.5 फीसदी से कम हो गई है।

6. गंभीर कुपोषित बच्चों की संख्या 2 लाख है।

7. उम्र के हिसाब से जिन बच्चों का वजन कम है, वे 34.7 फीसदी हैं। यह साल 2019-21 के 31.3 फीसदी था। इसमें इजाफा हुआ है।

8. उम्र के हिसाब से अंडरवेट बच्चों की संख्या 8 लाख है।

9. छत्तीसगढ में लगभग 24 लाख बच्चे कुपोषित हैं।

10. राज्य सरकार के अनुसार 2026-27 में आंगनबाड़ी एवं पोषण संबंधी योजनाओं के लिए लगभग 2 हजार करोड़ का प्रावधान।

25 रुपए में बाजार से क्या-क्या मिल सकता है

जानकारी के अनुसार स्थानीय बाजार में 25 रुपए में मुश्किल से एक -दो अंडे या आधा लीटर से कम दूध या सीमित मात्रा में दाल और अनाज खरीदा जा सकता है। दूसरी ओर पोषण विशेषज्ञ बताते हैं कि बढ़ते बच्चे को केवल पेट भरने वाला भोजन नहीं बल्कि प्रोटीन, आयरन, जिंक, विटामिन और अन्य सूक्ष्म पोषक तत्वों से भरपूर संतुलित आहार चाहिए। यदि दूध, दाल, अनाज, हरी सब्जियां, फल और पर्याप्त वसा को शामिल किया जाए तो एक सामान्य संतुलित आहार की बाजार लागत इससे काफी अधिक हो सकती है।