बिलासपुर। न्यायधानी से जुड़े फर्जी जाति प्रमाणपत्र मामले में हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। आबकारी विभाग के एक अधिकारी पर कथित फर्जी जाति प्रमाणपत्र के आधार पर नौकरी करने के आरोप लगे हैं। मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने जिला स्तरीय जाति सत्यापन समिति को जल्द जांच पूरी कर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। यह मामला मध्यप्रदेश में पदस्थ अतिरिक्त आबकारी आयुक्त राजेश हेनरी से जुड़ा है। याचिकाकर्ता प्रभात पांडे ने हाईकोर्ट में दायर याचिका में आरोप लगाया है कि, अधिकारी ने अनुसूचित जनजाति (ST) का फर्जी प्रमाणपत्र बनवाकर करीब 35 वर्षों से सरकारी नौकरी हासिल कर रखी है। शिकायत के बावजूद लंबे समय से जांच लंबित होने पर याचिकाकर्ता ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
याचिका में दावा किया गया कि, सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी में प्रमाणपत्र पर बिलासपुर तहसील की सील और हस्ताक्षर पाए गए, लेकिन तहसील कार्यालय के रिकॉर्ड में संबंधित प्रमाणपत्र का कोई उल्लेख नहीं मिला। इससे प्रमाणपत्र की वैधता पर सवाल खड़े हो गए हैं। मामले की सुनवाई जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की सिंगल बेंच में हुई। कोर्ट ने कहा कि, जब शिकायत सक्षम प्राधिकारी के पास लंबित है तो उसकी जांच तय समयसीमा में पूरी होना जरूरी है। हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनवाई का अवसर देते हुए जिला स्तरीय समिति को जल्द फैसला लेने के निर्देश दिए हैं। मामले को लेकर प्रशासनिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है।
