नई दिल्ली। हिंदू पंचांग के अनुसार 17 मई से ‘अधिकमास’ यानी मलमास की शुरुआत हो गई है, जो 15 जून तक चलेगा। हर तीन साल में एक बार आने वाले इस विशेष महीने के दौरान विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और नामकरण जैसे सभी मांगलिक कार्यों पर पूरे एक महीने के लिए विराम लग जाएगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस अवधि में ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति शुभ कार्यों के अनुकूल नहीं होती, जिससे इस समय किए गए कार्यों का पूर्ण फल नहीं मिल पाता। यही कारण है कि विद्वान भी इस दौरान बड़े संस्कार टालने की सलाह देते हैं।
भले ही इस दौरान सांसारिक शुभ कार्यों पर रोक होती है, लेकिन इसे ‘पुरुषोत्तम मास’ भी कहा जाता है, जो पूरी तरह भगवान विष्णु को समर्पित है। यह समय भौतिक विलासिता को छोड़कर आत्मिक शुद्धि और ईश्वर की शरण में जाने का है। इस पूरे महीने भगवान विष्णु की आराधना, सत्यनारायण कथा और मां लक्ष्मी के लिए व्रत रखना अत्यंत फलदायी माना गया है।
इस पावन समय में श्रीमद्भागवत गीता, विष्णु सहस्त्रनाम और रामायण का पाठ करने से जीवन की परेशानियां दूर होती हैं। कुंडली के ग्रह दोषों को शांत करने के लिए महामृत्युंजय मंत्र का जाप और शालिग्राम जी के सामने नियमित घी का दीपक जलाने से करियर की बाधाएं दूर होती हैं। इसके साथ ही, इस भीषण गर्मी में जरूरतमंदों को अनाज, कपड़े, जूते-चप्पल और विशेषकर छाते का दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। पवित्र नदियों में स्नान और भगवान शिव का जलाभिषेक करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है। मलमास भले ही सांसारिक कार्यों के लिए वर्जित हो, लेकिन यह पूजा-पाठ और तप के जरिए सुख-समृद्धि पाने का सबसे सुनहरा अवसर है।
