बालोद। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में शिक्षा व्यवस्था सुधारने की कवायद अब प्रशासन के लिए गले की फांस बन गई है। गिरते शिक्षा स्तर का हवाला देते हुए एक साथ 8 प्राचार्यों को निलंबित करने के फैसले ने पूरे जिले में हड़कंप मचा दिया है। स्थिति यह है कि, कार्रवाई के बाद अब जिले के आला अधिकारी खुद अपने ही आदेश पर सफाई देने से बच रहे हैं और ‘मौन’ साधे हुए हैं।

प्रशासनिक आदेश के अनुसार, अनुशासनहीनता और लापरवाही के आरोप में 8 प्राचार्यों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड किया गया है, जबकि 14 अन्य शिक्षकों की वेतन वृद्धि (इंक्रीमेंट) रोक दी गई है। इस ‘तानाशाही’ कार्रवाई के खिलाफ आक्रोशित प्राचार्य संगठन ने मोर्चा खोल दिया है। कलेक्ट्रेट पहुंचे प्राचार्यों ने परिसर में ही जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) को जमकर खरी-खोटी सुनाई। संगठन का आरोप है कि, बिना किसी निष्पक्ष जांच और जमीनी हकीकत जाने यह कठोर कदम उठाया गया है।

प्राचार्य एसोसिएशन के पदाधिकारियों का सवाल है कि, क्या प्रशासन ने निलंबन से पहले बीजापुर जैसे जिलों के रिजल्ट और वहां की परिस्थितियों का अध्ययन किया? छत्तीसगढ़ प्रांत प्राचार्य एसोसिएशन के पदाधिकारी एम.आर. खान ने इस कार्रवाई को एकतरफा बताया है। जिला संयोजक लोकेश कुमार साहू ने चेतावनी दी है कि यदि निलंबन वापस नहीं लिया गया, तो उग्र आंदोलन किया जाएगा। दिलचस्प बात यह है कि, कलेक्टर दिव्या मिश्रा और DEO मधुलिका तिवारी ने इस विवाद पर फिलहाल चुप्पी साध ली है। हालांकि, कलेक्टर से मुलाकात के बाद प्राचार्यों ने ‘सकारात्मक चर्चा’ होने की बात कही है। अब देखना यह होगा कि क्या प्रशासन अपने इस विवादित फैसले को वापस लेता है या शिक्षा विभाग में जारी यह खींचतान और गहराएगी।
