रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के ‘हमर अस्पताल’ (गुढ़ियारी) से एक बेहद डरावनी तस्वीर सामने आई है। आरोप है कि सरकारी सिस्टम की लापरवाही के चलते करोड़ों रुपये की दवाएं डंप पड़ी हैं और मरीजों को ऐसी दवाइयां बांटी जा रही हैं जो कुछ ही दिनों में एक्सपायर होने वाली हैं। इस गंभीर मुद्दे पर कांग्रेस नेता और पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने मोर्चा खोलते हुए इसे सीधे तौर पर ‘मरीजों की जान से खिलवाड़’ करार दिया है।

विकास उपाध्याय का दावा है कि अस्पताल में भ्रष्टाचार का बड़ा खेल चल रहा है। चहेते ठेकेदारों को फायदा पहुँचाने के लिए उन दवाओं की भारी सप्लाई की जा रही है जिनकी अस्पताल में मांग ही नहीं है। नतीजतन, बीपी, शुगर, प्रेग्नेंसी और नवजात बच्चों से जुड़ी महत्वपूर्ण दवाएं अलमारियों में सड़ रही हैं। नियमानुसार, एक्सपायरी से 6 महीने पहले दवाओं को वापस करना होता है, लेकिन यहाँ ऐसी दवाएं स्टॉक में हैं जो इसी महीने या अगले कुछ महीनों में बेकार हो जाएंगी। अस्पताल परिसर में एक्सपायर हो चुकी दवाओं का ढेर किसी कचरे की तरह पड़ा देखा गया है।

हैरानी की बात यह है कि, सांस की बीमारी, आयरन फोलिक एसिड और प्रेग्नेंसी टेस्ट किट जैसी जरूरी चीजें मई और जून 2026 की समय सीमा के करीब हैं, फिर भी इन्हें मरीजों तक पहुँचाया जा रहा है। मामले के तूल पकड़ने पर अस्पताल के प्रभारी अधीक्षक डॉक्टर प्रेम रात्रे ने सफाई दी है कि एक्सपायरी दवाओं को अलग काउंटर पर रखा गया है और इसकी जानकारी उच्च अधिकारियों को दे दी गई है। हालांकि, सवाल यह उठता है कि अगर दवाएं एक्सपायर हो रही हैं, तो उन्हें समय रहते जरूरतमंदों तक क्यों नहीं पहुँचाया गया? विकास उपाध्याय ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
