सुशासन के दावों के बीच प्रदेश की जनता बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्षरत : अरुण वोरा

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दुर्ग। प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व पूर्व विधायक अरुण वोरा ने प्रदेश की वर्तमान स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि छत्तीसगढ़ में शासन द्वारा चलाए जा रहे सुशासन तिहार के सरकारी दावों और जमीनी हकीकत में जमीन आसमान का अंतर है। उन्होंने कहा कि जब प्रदेश का आम नागरिक मूलभूत सुविधाओं और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहा हो तब ऐसा तिहार केवल एक प्रशासनिक औपचारिकता और दिखावा प्रतीत होते हैं। वोरा ने शासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि वास्तविक सुशासन विज्ञापनों में नहीं, बल्कि जनता की संतुष्टि में झलकता है। वोरा ने कहा कि अत्यंत खेद का विषय है कि निराश्रितों और बुजुर्गों को मिलने वाली पेंशन पिछले छह माह से रुकी हुई है। हमारे बुजुर्ग अपनी छोटी.छोटी जरूरतों के लिए परेशान हो रहे हैं। बिजली बिलों में कटौती के वादों के विपरीत जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ लाद दिया गया है। जिससे मध्यम और निम्न वर्ग का बजट बिगड़ गया है। राशन की दुकानों से आवश्यक खाद्यान्न का वितरण अनियमित हो गया है, जिससे गरीब परिवारों के सामने संकट खड़ा हो गया है।

राज्य का युवा बेरोजगारी के कारण अनिश्चित भविष्य की ओर देख रहा है वहीं प्रदेश में बढ़ती आपराधिक घटनाएं आम आदमी की चिंता और भय को बढ़ रही हैं। अरुण वोरा ने कहा लोकतंत्र में सरकार की पहली प्राथमिकता जनता की सेवा और उनकी समस्याओं का निराकरण होना चाहिए। जब बुजुर्गों की पेंशन रुकी हो और युवा परेशान हो तो ऐसे में उत्सव मनाना गरिमामय नहीं लगता। यह सुशासन नहीं बल्कि शासन की विफलताओं को छिपाने का प्रयास है। जनता की सेवा ही वास्तविक सुशासन है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया है कि वे दिखावे के आयोजनों के बजाय जनहित के इन गंभीर मुद्दों पर तत्काल ध्यान दें और रुकी हुई योजनाओं को पुन: सुचारू रूप से संचालित करें।