वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पोप लियो XIV के बीच तीखी बयानबाजी ने अमेरिका और वेटिकन के रिश्तों में असामान्य तनाव पैदा कर दिया है। ट्रंप ने सोमवार को साफ तौर पर कहा कि वह पोप से माफी नहीं मांगेंगे और उनके विचारों को गलत बताया। उन्होंने कहा मैं पोप लियो से माफी नहीं मांगूंगा- ट्रंप व्हाइट हाउस में मीडिया से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि मैं पोप लियो से माफी नहीं मांगूंगा। वह अपराध और कई मुद्दों पर बहुत कमजोर हैं। उन्होंने ईरान के मुद्दे पर भी पोप की आलोचना करते हुए कहा कि ईरान को परमाणु शक्ति नहीं बनने दिया जा सकता। वहीं यह विवाद तब और बढ़ गया जब ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लंबा पोस्ट लिखकर पोप लियो XIV पर हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि अगर वह राष्ट्रपति नहीं बने होते तो पोप की नियुक्ति ही नहीं होती। ट्रंप ने पोप को अपराध पर कमजोर और विदेश नीति के लिए खराब बताते हुए उनकी शांति और संवाद की अपीलों की आलोचना की।
आपको बता दें की ट्रंप ने अपने प्रशासन का बचाव कैसे किया? ट्रंप ने अपने प्रशासन की उपलब्धियों का बचाव करते हुए कहा कि अमेरिका में अपराध दर कम हुई है और आर्थिक स्थिति बेहतर है। उन्होंने पोप को सलाह दी कि वह एक महान पोप बनने पर ध्यान दें, न कि राजनीति में हस्तक्षेप करें। पोप लियो ने इस विवाद से बचने का संकेत दिया दूसरी ओर, पोप लियो XIV ने इस विवाद में सीधे टकराव से बचने का संकेत दिया। अल्जीरिया की यात्रा के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि मैं राजनेता नहीं हूं और डोनाल्ड ट्रंप के साथ बहस में पड़ने का मेरा कोई इरादा नहीं है। वहीं पोप ने शांति और संवाद पर जोर देते हुए कहा कि दुनिया को युद्ध से दूर रहना चाहिए और वैश्विक सद्भाव को बढ़ावा देना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि धर्म को राजनीतिक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। ईरान ने की पोप की सराहना इस बीच ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकेर कलीबाफ ने पोप लियो के युद्ध और हिंसा के खिलाफ दिए गए बयानों की सराहना की है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कालिबाफ ने पोप के रुख को निडर और नैतिक आवाज बताया। उन्होंने लिखा, मुझे कोई डर नहीं है का संदेश उन सभी के लिए प्रेरणा है जो निर्दोष लोगों की हत्या के खिलाफ आवाज उठाते हैं।
