सूरज की तपिश और आलस का वार: जाने क्यों कम हो रही है लोगों की फिजिकल एक्टिविटी?

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नई दिल्ली। आज – कल क्लाइमेट चेंज की वजह से दुनिया भर में टेम्परेचर बढ़ रहा है। हाल की स्टडीज़ में चेतावनी दी गई है कि इस ज़्यादा टेम्परेचर का भविष्य में इंसानी सेहत पर गंभीर असर पड़ सकता है। द लैंसेट ग्लोबल हेल्थ जर्नल में छपी एक स्टडी के मुताबिक, बढ़ती गर्मी की वजह से 2050 तक दुनिया भर में लाखों लोगों को फिजिकल एक्टिविटी खोने का खतरा है। स्टडी का अनुमान है कि ज़्यादा टेम्परेचर की वजह से हर साल और 7 लाख लोगों की समय से पहले मौत हो सकती है। इसमें यह भी कहा गया है कि प्रोडक्टिविटी में लगभग 3.68 बिलियन डॉलर का नुकसान हो सकता है। रिसर्चर्स का मानना ​​है कि यह वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन (WHO) के 2030 तक फिजिकल एक्टिविटी को 15 परसेंट बढ़ाने के टारगेट में एक बड़ी रुकावट बन सकता है।

आपको बता दें की लैटिन अमेरिकी देशों के साइंटिस्ट्स, खासकर अर्जेंटीना की पोंटिफिकल कैथोलिक यूनिवर्सिटी के साइंटिस्ट्स ने यह स्टडी की। इसमें भारत की स्थिति का भी एनालिसिस किया गया। इसमें अनुमान लगाया गया कि कम एमिशन, मौजूदा ट्रेंड्स का जारी रहना और ज़्यादा फॉसिल फ्यूल कंजम्प्शन जैसे तीन भविष्य के सिनेरियो में, भारत में 2050 तक फिजिकल इनएक्टिविटी की वजह से हर 100,000 लोगों पर लगभग 10.62 मौतें होने की संभावना है। क्लाइमेट चेंज की वजह से दुनिया गर्म हो रही है। इस बढ़ती गर्मी से लोगों की एक्सरसाइज करने की क्षमता कम हो रही है। एनवायर्नमेंटल रिसर्च हेल्थ जर्नल में छपी एक और स्टडी के मुताबिक, ट्रॉपिकल और सबट्रॉपिकल इलाकों में बहुत ज़्यादा गर्मी और नमी के समय जवान और बूढ़े लोग सुरक्षित रूप से फिजिकल एक्टिविटी नहीं कर पाते हैं। ऐसे हालात में, बैठना या लेटना ही एकमात्र ऑप्शन होता है।

वहीं फिजिकल इनएक्टिविटी दुनिया भर में एक बड़ी हेल्थ प्रॉब्लम बनी हुई है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन के मुताबिक, तीन में से एक व्यक्ति हर हफ़्ते की एक्सरसाइज की ज़रूरतों को पूरा नहीं करता है। WHO की गाइडलाइंस बताती हैं कि 18-64 साल के लोगों को हर हफ़्ते कम से कम 150 मिनट मीडियम एक्सरसाइज या 75 मिनट ज़ोरदार एक्सरसाइज करनी चाहिए। वे यह भी सलाह देते हैं कि लोग हफ़्ते में कम से कम दो दिन मसल्स को मज़बूत करने वाली एक्सरसाइज करें। इस स्टडी में, जिसमें 2000 से 2022 तक 156 देशों के डेटा का एनालिसिस किया गया, 2050 तक तापमान के असर का अंदाज़ा लगाया गया। इसके मुताबिक, हर अगले महीने जब औसत तापमान 27.8 डिग्री सेल्सियस से ऊपर होगा, तो दुनिया भर में फिजिकल इनएक्टिविटी 1.5 परसेंट बढ़ जाएगी। अनुमान है कि कम और मिडिल इनकम वाले देशों में यह 1.85 परसेंट तक बढ़ सकता है।

रिसर्चर्स ने कहा कि इन हालातों की वजह से 2050 तक 4.7 लाख से 7 लाख और मौतें हो सकती हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यह खासकर ट्रॉपिकल इलाकों में सच हो सकता है। रिसर्चर्स ने इस समस्या को हल करने के लिए कई उपाय भी सुझाए। उन्होंने कहा कि एक्सरसाइज गाइडलाइंस में गर्मी के खतरों के बारे में जागरूकता बढ़ाना, छायादार रास्ते बनाना, जोखिम वाले ग्रुप्स के लिए ठंडी एक्सरसाइज की जगहें उपलब्ध कराना और काम की जगहों पर गर्मी से सुरक्षा के स्टैंडर्ड्स को सख्ती से लागू करना जैसे उपाय ज़रूरी हैं। एक्सपर्ट्स का सुझाव है कि फिजिकल एक्टिविटी की कमी को सिर्फ लाइफस्टाइल चॉइस के तौर पर नहीं, बल्कि क्लाइमेट चेंज से जुड़ी एक बड़ी हेल्थ प्रॉब्लम के तौर पर देखा जाना चाहिए। नहीं तो, वे चेतावनी देते हैं कि भविष्य में कार्डियोवैस्कुलर बीमारियां और मेटाबोलिक प्रॉब्लम बढ़ने का खतरा है, साथ ही आर्थिक नुकसान भी होगा।