कोंडागांव। बस्तर अंचल की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं के बीच कोंडागांव जिले में इस वर्ष भी चैत्र माह में पारंपरिक माटी तिहार श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर किसानों और ग्रामीणों ने धरती माता की पूजा-अर्चना कर अच्छी फसल, सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। पूरे क्षेत्र में पारंपरिक रीति-रिवाजों और आस्था का अनूठा संगम देखने को मिला। माटी तिहार बस्तर क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण एक दिवसीय पारंपरिक पर्व है, जिसकी तिथि हर गांव में स्थानीय मान्यताओं के अनुसार तय की जाती है। गांव के गायता, पुजारी और प्रमुखजन मिलकर इस दिन का निर्धारण करते हैं। निर्धारित तिथि पर ग्रामीण पूरी श्रद्धा के साथ धरती माता की पूजा करते हैं और इस दिन कृषि से जुड़े सभी कार्य पूरी तरह बंद रखे जाते हैं।
ग्रामीणों की मान्यता है कि माटी तिहार के दिन मिट्टी खोदना, खेतों में हल चलाना या किसी भी प्रकार का कृषि कार्य करना वर्जित होता है। इस परंपरा का उल्लंघन सामाजिक रूप से अनुचित माना जाता है और इसके लिए दंड का भी प्रावधान है। यह पर्व धरती के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का प्रतीक माना जाता है। पर्व के दौरान गांवों में सामूहिक भागीदारी का विशेष उत्साह देखने को मिला। प्रत्येक घर से स्वेच्छा से चंदा एकत्र किया गया, वहीं राहगीरों और वाहन चालकों से भी सहयोग लिया गया, जिसे लोगों ने श्रद्धा से दिया। पूजा स्थल पर चावल, दाल, सब्जियां, फल, कंद-मूल और पशु-पक्षियों के लिए भेंट अर्पित की गई। आयोजन के दौरान पारंपरिक गीत, नृत्य और लोक संस्कृति की मनमोहक झलक भी देखने को मिली। ग्रामीणों का कहना है कि माटी तिहार केवल एक पर्व नहीं, बल्कि धरती माता के प्रति आभार व्यक्त करने की परंपरा है, जो आने वाली पीढ़ियों को प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर जीवन जीने का संदेश देती है। इसी क्रम में ग्राम बड़ेडोंगर में आयोजित सात दिवसीय शिव महापुराण कथा का भी भव्य समापन हुआ। समापन अवसर पर विशेष हवन-आरती का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। पूरे वातावरण में भक्ति और श्रद्धा का माहौल बना रहा। सात दिनों तक चले इस धार्मिक आयोजन में विधि-विधान से पूजित एवं सिद्ध किए गए रुद्राक्ष शिवलिंग के रुद्राक्षों को महाराज शिवानंद जी द्वारा भक्तों को आशीर्वाद स्वरूप वितरित किया गया। सिद्ध रुद्राक्ष प्राप्त करने के लिए श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखा गया।
आयोजकों के अनुसार, शिव महापुराण कथा का उद्देश्य लोगों में धार्मिक जागरूकता बढ़ाना और जीवन में आध्यात्मिक मूल्यों को सुदृढ़ करना है। कथा के दौरान भगवान शिव से जुड़े प्रसंगों का विस्तार से वर्णन किया गया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। समापन के दौरान भक्ति गीतों और जयकारों से पूरा गांव गूंज उठा। स्थानीय लोगों ने इस आयोजन को सफल और प्रेरणादायक बताते हुए भविष्य में भी ऐसे आयोजनों के निरंतर आयोजन की उम्मीद जताई।
माटी तिहार: किसानों ने नमन की धरती माता, समृद्धि के लिए की पूजा-अर्चना
