रायपुर। छत्तीसगढ़ के तिल्दा ब्लॉक में स्थित साकरा गांव के किसान संजय वर्मा ने परंपरागत खेती से हटकर नवाचार की मिसाल पेश की है। शासकीय योजना से मिली सहायता से धान की खेती छोड़ उन्होंने रजनीगंधा (ट्यूबरोज) की खेती अपनाई और आज सालाना करीब 6 लाख रुपये की आय अर्जित कर रहे हैं।
करीब 8 वर्ष पूर्व फसल चक्र परिवर्तन के तहत शुरू की गई यह पहल अब उनके लिए मुख्य व्यवसाय बन चुकी है। राष्ट्रीय बागवानी मिशन से मिले 75 हजार रुपये के अनुदान ने उनकी इस नई शुरुआत को मजबूत आधार दिया।

संजय की उगाई रजनीगंधा की मांग अब स्थानीय बाजारों से आगे बढ़कर नागपुर जैसे बड़े शहरों तक पहुंच चुकी है। शादी-विवाह और धार्मिक आयोजनों में इन फूलों की लगातार मांग उन्हें सालभर स्थायी आय प्रदान कर रही है।
कम लागत और अधिक मुनाफे वाली इस खेती में एक एकड़ से करीब 1 लाख स्टिक का उत्पादन होता है। चार एकड़ में खेती कर वे लगभग 9.60 लाख रुपये तक का उत्पादन प्राप्त कर रहे हैं, जिसमें से करीब 5.40 लाख रुपये शुद्ध लाभ के रूप में मिल रहा है।

संजय वर्मा का कहना है कि शुरुआत में संशय जरूर था, लेकिन मेहनत और जिला प्रशासन के सही मार्गदर्शन से सफलता मिली। अब वे आसपास के किसानों को भी फूलों की खेती अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
जिला उद्यानिकी अधिकारी कैलाश पैकरा ने बताया कि राष्ट्रीय बागवानी मिशन किसानों के लिए लाभकारी योजना साबित हो रही है। इस योजना के तहत कृषक पारंपरिक धान खेती से आगे बढ़कर फसल चक्रण अपनाते हुए फूलों की खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं। परिणामस्वरूप, कम लागत में अधिक आय अर्जित कर किसान आर्थिक रूप से सशक्त बन रहे हैं।

