सिकासार का ‘सरप्लस पानी’ बनेगा वरदान: 3400 करोड़ की मेगा नहर लिंक से महासमुंद के सूखे पर ब्रेक

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गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद और महासमुंद जिले के लिए बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। सिकासार जलाशय के अतिरिक्त पानी का अब बेहतर उपयोग किया जाएगा, जिससे महासमुंद जिले के सूखे हालात को काफी हद तक खत्म करने की तैयारी है। राज्य सरकार ने सिकासार-कोडार जलाशय नहर लिंक परियोजना के लिए 3400 करोड़ रुपये की मंजूरी दे दी है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का लक्ष्य वर्ष 2029 तक पूरा करना तय किया गया है।

इस योजना के तहत सिकासार से कोडार डेम को जोड़ने के लिए 88 किलोमीटर लंबी भूमिगत स्टील पाइपलाइन बिछाई जाएगी। खास बात यह है कि, इस तकनीक से पानी के वाष्पीकरण और रिसाव को कम करते हुए करीब 25 प्रतिशत तक जल की बचत होगी। विभाग का दावा है कि, इससे 30 से 35 मिलियन घन मीटर अतिरिक्त पानी संरक्षित किया जा सकेगा, जिसे सिंचाई और पेयजल जरूरतों में इस्तेमाल किया जाएगा।

परियोजना के पूरा होने के बाद लगभग 25 हजार हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि सिंचित होगी। वर्तमान में जहां 101 गांवों में 58 हजार हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई सुविधा मिल रही है, वहीं इस योजना से 178 नए गांवों को भी इसका लाभ मिलेगा। कुल 79,650 परिवार-जिनमें बड़ी संख्या अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति समुदाय की है-इससे सीधे लाभान्वित होंगे।

इस परियोजना की एक और खासियत आधुनिक ‘स्काडा’ तकनीक का उपयोग है, जिससे पानी की आपूर्ति पूरी तरह ऑटोमेटिक और सेंसर आधारित होगी। हर गांव के लिए अलग आउटलेट बनाया जाएगा, जिसे कंट्रोल रूम से मॉनिटर किया जाएगा। परियोजना की परिकल्पना कार्यपालन अभियंता एसके बर्मन ने की थी, जिन्होंने 2022 में इस विचार को अधिकारियों के सामने रखा। तकनीकी नवाचार और दूरदर्शिता को देखते हुए इसे तेजी से मंजूरी मिली। अब इसके दूसरे चरण की तैयारी भी शुरू हो गई है, जिसमें सिकासार को अमानाला और सोन नदी से जोड़ने की योजना बनाई जा रही है। यह परियोजना न सिर्फ सिंचाई बल्कि पेयजल संकट और भूजल स्तर सुधारने में भी मील का पत्थर साबित हो सकती है।