नई दिल्ली। राष्ट्रपति दौपदी मुर्मु ने युवाओं काे देश की सबसे मूल्यवान संपदा बताते हुए शुक्रवार को कहा कि सरकार और समाज को विद्यार्थियों के वर्तमान और भविष्य की सुरक्षा राष्ट्र की सुरक्षा की तरह मिल जुल कर करनी है। उन्होंने कहा सार्वजनिक परीक्षाएं युवाओं के लिए अवसर के द्वारा हैं और सरकार उनमें सुधार कर रही है।
राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार के सुधारवादी कदमों और नीतियों से देश में युवाओं के लिए अवसर बढ़ रहे हैं।
80वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर आकाशवाणी और दूरदर्शन से देशवासियों के नाम संदेश में दुनिया के विभिन्न हिस्सों में चल रहे संघर्षों का उल्लेख करते हुए कहा कि इनसे सभी देशों पर प्रभाव पड़ता है लेकिन वर्तमान विपरीत परिस्थितियों में भी भारत की अर्थव्यवस्था बुनियादी मजबूती के साथ तेज गति से आगे बढ़ रही है।
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उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष 2047 विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए हम आगे बढ़ रहे और हमारा विकास का रास्ता विरासत और समावेशन के साथ बढने का रास्ता है। उन्होंने विश्वास जताया कि सरकार के प्रयासों और जनता की भागीदारी से समृद्धि जन-जन तक पहुंचेगी।
मुर्मु ने कहा कि नागरिकों के लिए प्रतिष्ठा और अवसर की समानता तथा व्यक्ति की गरिमा, हमारे संविधान के प्रमुख आदर्श हैं।
आज साधारण पृष्ठभूमि के लोग, अनेक क्षेत्रों में, असाधारण योगदान दे रहे हैं। इससे, मेरा यह विश्वास दृढ़ होता है कि आज के भारत में हर व्यक्ति बड़े सपने देख भी सकता है और उन्हें पूरा भी कर सकता है।
विभिन्न क्षेत्रों में देश की महिलाओं की प्रगति और उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि देश की महिलाएं विभिन्न क्षेत्रों में नेतृत्व प्रदान कर रही है । उन्होंने कहा कि लोक सभा और विधान सभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व आरक्षित करने के लिए वर्ष 2023 में विधेयक पारित किया जा चुका है और इसके लागू होने से महिलाओं का नेतृत्व और बढ़ेगा तथा लोकतंत्र अधिक समावेशी बनेगा।
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विदेश नीति के संबंध में मुर्मु ने कहा कि शांति, सहयोग , संवाद तथा वसुधैव कुटुम्बकम के आदर्श भारत की विदेश नीति के प्रधान स्तम्भ हैं।
ऐसे प्रयास किये जा रहे हैं कि संयुक्त राष्ट्र संघ सहित बहुपक्षीय संस्थाओं में विश्व समुदाय का समुचचित प्रतिनिधित्व हो और हमारे इन प्रयासों को अनेक देशों का प्रबल समर्थन मिल रहा है।
पाकिस्तान का उल्लेख किये बिना उन्होंने कहा कि आतंकियों और उनके समर्थकों को ‘आपरेशन सिंदूर’ से यह कड़ा संदेश दिया गया है कि उन्हें अपने किये की सजा जरूर मिलेगी।सिंधु जल संधि को निलंबित किये जाने को उन्होंने देश विशेष कर किसानों के हित में एक निर्णायक कदम बताया। उन्होंने कहा कि एक ओर भारत जहां भगवान बुद्ध की शांति और आध्यात्मिक परंपराओं से जुड़ा हुआ है वही राष्ट्र ने अतीत में अपने आत्म सम्मान और गौरवशाली परम्पराओं की रक्षा करने के लिए युद्ध की प्रभावशाली क्षमताओं को भी दर्शाया है।
देश को नक्सल मुक्त करने को एक बड़ी उपलब्धि बताते हुए मुर्मु ने कहा कि अब नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में उत्साह का माहौल है तथा विकास की सर्वस्पर्शी धारा प्रवाहित हो रही है।राष्ट्रपति ने देश को आजाद करने वाले स्वतंत्रता के सिपाहियों और राष्ट्र निर्माण में लगे सभी वर्ग के लोगों , देश की वाह्य और आंतरिक सुरक्षा में जुटी सेनाओं और पुलिस बलों के योगदान को याद करते हुए उनका आभार जताया। उन्होंने सभी से विकसित भारत बनाने की राष्ट्रीय साधना में स्वयं को समर्पित करने का आह्वान किया।
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युवाओं के संबंध में मुर्मु ने कहा, ” कुल आबादी में 65 प्रतिशत लोगों की आयु 35 वर्ष से कम है। यह युवा आबादी हमारी सबसे मूल्यवान सम्पदा है। हमारे युवा प्रतिभावान और हुनरमंद हैं तथा विभिन्न समस्याओं के नवाचार और व्यावहारिक समाधान को देखकर मुझे समाज और देश के लिए उनकी प्रतिबद्धता का परिचय मिलता है।
उन्होंने खेल के मैदान और देश-विदेश में उद्यम क्षेत्र से लेकर अन्तरिक्ष की ऊंचाइयों तक युवाओं की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा, ‘ हमारे विद्यार्थी, भारत के भविष्य निर्माता हैं। जिस तरह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सरकार और समाज का एकजुट रहना जरूरी है, उसी तरह विद्यार्थियों के वर्तमान और भविष्य की सुरक्षा के लिए भी सभी के सम्मिलित प्रयास जरूरी हैं।
उन्होंने कहा, ” सार्वजनिक परीक्षाएं, विद्यार्थियों के लिए अवसरों के द्वार खोलती हैं। इसलिए, सरकार इन परीक्षाओं में सुधार के लिए व्यापक कदम उठा रही है। इन सुधारों का उद्देश्य है कि सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों पर पूरी तरह से अंकुश लगे, परीक्षा प्रणाली और अधिक पारदर्शी, तथा युवाओं के लिए सुरक्षित एवं भरोसेमंद हो।
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राष्ट्रपति ने कहा कि एक ओर हमारे देश में सबसे बड़ी युवा आबादी है तो दूसरी ओर वरिष्ठ नागरिकों की संख्या भी निरंतर बढ़ रही है वरिष्ठ नागरिकों के प्रति अपनेपन की भावना तथा उनके आत्मसम्मान को बनाए रखने के लिए पूरे समाज को संवेदनशील रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार ने वरिष्ठ नागरिकों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए अनेक कदम उठाए हैं। 70 साल और उससे अधिक आयु के लगभग 6 करोड़ वरिष्ठ नागरिकों के लिए प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक की निशुल्क स्वास्थ्य सेवा सुविधाएं उपलब्ध हैं।
मुर्मु ने कहा कि संविधान में कार्यपालिका, विधायिका तथा न्यायपालिका के उत्तरदायित्वों का स्पष्ट उल्लेख है। जनप्रतिनिधियों का कर्तव्य है कि वे विधायिका में, जन-आकांक्षाओं को अभिव्यक्त करें। हर नागरिक को, विशेषकर वंचित वर्गों के लोगों को, समानता के आधार पर, सम्मान के साथ, समय से न्याय मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक से कुछ अधिक समय में हमारे देश ने तेज गति से समावेशी विकास किया है, विरासत और विकास के समन्वय को प्राथमिकता दी है, तथा विकास में बाधक दशकों पुराने अनेक अवरोधों को दूर किया है।
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उन्होंने कहा कि महिलाओं की शिक्षा के क्षेत्र में सफलता के नए प्रतिमान स्थापित हुए हैं। 25 करोड़ से अधिक लोगों को गरीबी से मुक्ति दिलाने में सफलता मिली है।लगभग 59 करोड़ खाताधारक बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ चुके हैं। उनमें 32 करोड़ से अधिक महिला खाताधारक शामिल हैं।
80 करोड़ लोगों के लिए निशुल्क राशन की व्यवस्था द्वारा उनकी खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की गई है। ‘आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना’ के तहत 60 करोड़ लोगों को प्रतिवर्ष 5 लाख रुपए तक की निशुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई है।
राष्ट्रपति ने कहा कि किसान सम्मान निधि तथा किसान क्रेडिट कार्ड्स से खेती, डेयरी, मुर्गी पालन, मत्स्य पालन और मधुमक्खी पालन जैसी गतिविधियों से जुड़े किसान भाई-बहनों को संबल मिला है।
उन्होंने कहा कि “हम विरासत और विकास के समन्वय के साथ आगे बढ़ रहे हैं। ” हमारे देश में विश्व का सबसे बड़ा और सबसे अच्छा डिजिटल अवसंरचना विकसित किया गया है। गांवों की छोटी-छोटी दुकानों में तथा रेहड़ी-पटरी पर भी डिजिटल भुगतान हो रहे हैं। राष्ट्रपति ने पिछले एक दशक में देश में सड़क , रेल , जलमार्ग और हवाइ अड्डे जैसे बुनियादी ढांचे के विकास में तीव्र प्रगति का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर विरीत परिस्थिति में भी, ” हमारे देश की अर्थव्यवस्था, सबसे तेज गति से बढ़ती हुई प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में आगे बढ़ रही है। ” उन्होंने कहा कि आधुनिक विकास के मार्ग पर आगे बढ़ने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी भारत विश्वस्तर पर अग्रणी योगदान दे रहा है।
उन्होंने कहा ,
- हमारी विदेश नीति, देश हित पर आधारित है।
- शांति, सहयोग, संवाद तथा वसुधैव कुटुंबकम् के आदर्श हमारी विदेश नीति के स्तम्भ हैं।
- आर्थिक सहयोग बढ़ाने तथा पारस्परिक सम्बन्धों को और प्रगाढ़ बनाने के लिए हमने अनेक देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते किए हैं।
- राष्ट्रपति ने कहा कि भारत दक्षिणी गोलार्ध के गरीब और विकासील देशों में अग्रणी भूमिका निभा रहा है और विश्व पटल पर भारत का सम्मान बढ़ा है।
उन्होंने कहा, ”
- हम नियम आधारित विश्व व्यवस्था में विश्वास रखते हैं।
- हमारा प्रयास है कि संयुक्त राष्ट्र संघ सहित, बहुपक्षीय संस्थाओं में विश्व समुदाय का समुचित प्रतिनिधित्व हो।
- हमारे इस प्रयास को अनेक देशों का प्रबल समर्थन मिल रहा है।
उन्होंने प्राकृतिक संसाधनों के न्यायोचित उपयोग की जरूरत पर बल देते हुए कहा कि “प्राकृतिक संपदाओं पर हमारी भावी पीढ़ियों का भी उतना ही अधिकार है जितना हमारा है। ” उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति हमारी आस्था हमारी परंपरा का हिस्सा है। इसी संदर्भ में उन्होंने संताली भाषा के कवि पंडित रघुनाथ मुर्मु द्वारा रचित एक गीत के इन शब्दों का उल्लेख किया- ‘ दारे गुजूग कान ञेल ते मिरु चेणेय राग बयहा दाया हाया गे। गुजूग कान आबोवा जाति धरम दारे चेदाग बाबोन राग बयहा आबो अना ञेल ते। ‘ इसमें एक पेड़ के पूरी तरह सूख जाने के कारण रोते हुए एक तोते का वर्णन है।
मुर्मु ने कहा कि यह देखकर बहुत प्रसन्नता होती है कि शिक्षा के क्षेत्र में हमारी बेटियां प्रभावशाली प्रदर्शन कर रही हैं और कृषि से लेकर खेल के मैदान तक महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है। उन्होंने इसी संदर्भ में हाल ही में ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों में महिलाओं की बड़ी सफलता का उल्लेख किया जहां भारत के कुल 13 स्वर्ण पदकों में 8 स्वर्ण पदक बेटियों ने जीते हैं।
उन्होंने कहा कि लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं का 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व आरक्षित करने के लिए, वर्ष 2023 में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पारित किया जा चुका है। इस अधिनियम के लक्ष्य को प्राप्त करने से महिलाओं का नेतृत्व बढ़ेगा तथा हमारा लोकतन्त्र और अधिक समावेशी बनेगा।
उन्होंने कारगिल विजय दिवस और आपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए कहा , ” सत्य और न्याय के पक्ष में, मानवता विरोधी शक्तियों पर विजय प्राप्त करने की भारतीय परंपरा पर हम गर्व करते हैं। ” आपरेशन सिंदूर को आतंकवाद के विरुद्ध वह ऐतिहासिक ऑपरेशन, भारतीय सेनाओं की अचूक क्षमता का प्रमाण बताते हुए कहा , ” आतंकियों और उनके समर्थकों को यह कठोर संदेश दिया गया कि वे चाहे कहीं भी जाकर छिप जाएं, लेकिन उन्हें अपने किए की सजा जरूर मिलेगी। आतंकवाद को संरक्षण देने वाले देश के साथ अतीत में की गई सिंधु जल संधि का निलंबन करना हमारे देश के, विशेषकर किसानों के हित में एक निर्णायक कदम है।
नक्सल मुक्त अभियान की सफलता को एक बड़ी उपलब्धि बताते हुए राष्ट्रपति नेक कहा , “अब नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में उत्साह का वातावरण है तथा विकास की सर्वस्पर्शी धारा प्रवाहित हो रही है। बस्तर ओलिंपिक्स में खिलाड़ियों ने, बस्तर पंडुम में कलाकारों ने, तथा इन आयोजनों में दर्शकों ने, भारी संख्या में हिस्सा लिया।
उन्होंने मराठा सैन्य परंपरा से जुड़े 12 दुर्गों को पिछले वर्ष और भगवान बुद्ध के प्रथम प्रवचन के स्थल सारनाथ को इस वर्ष यूनेस्को की ” विश्व विरासतों की सूची” में स्थान दिये जाने का उल्लेख करते हुए कहा, ” भारतभूमि में एक ओर भगवान बुद्ध से जुड़े आध्यात्मिक स्मारक हैं तो दूसरी ओर आत्मसम्मान तथा अपनी गौरवशाली परम्पराओं की रक्षा हेतु युद्ध करने की हमारी प्रभावशाली क्षमता के प्रतीक भी विद्यमान हैं।
उन्होंने कहा कि सभी भारतवासियों का विकास और कल्याण ही विकसित भारत के निर्माण का वास्तविक लक्ष्य है। उन्होंने देशवासियों देश प्रेम और देश की भलाई के लिए काम करने का आह्वान करते हुए तेलुगू भाषा के कवि गुरजाडा अप्पाराव की पक्तियों-
“देसमुनु प्रेमिंचुमन्ना, मंचि अन्नदि पेंचुमन्ना।
देसमंटे, मट्टि कादोय, देसमंटे, मनुषुलोय।”
का उल्लेख किया जिनका भाव है,
देश से प्रेम करो; भलाई को बढ़ाओ; देश का अर्थ केवल मिट्टी ही नहीं है।
देश का अर्थ समस्त जनसमुदाय है।
मुर्मु ने कहा,, ‘ मुझे विश्वास है कि समाज की भागीदारी और सरकार के प्रयासों से गांव-गांव में, नगर-नगर में, भारत के घर-घर में रहने वाले सभी लोग स्वस्थ, सुखी और समृद्ध बनेंगे। आइए, देश प्रेम की इसी सर्व समावेशी भावना के साथ हम सब स्वतंत्र भारत को विकसित भारत बनाने की राष्ट्रीय-साधना में स्वयं को समर्पित करें।
