कोरिया। छत्तीसगढ़ में सौर सुजला योजना किसानों के लिए सिंचाई का किफायती और स्थायी विकल्प बनकर उभर रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार कृषि उत्पादन बढ़ाने, खेती की लागत कम करने और किसानों की आय में वृद्धि के लिए सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई को बढ़ावा दे रही है। खासकर दूरस्थ और विद्युत सुविधा से वंचित क्षेत्रों में सोलर पंप किसानों के लिए खेती का मजबूत आधार बन रहे हैं। प्रदेश में 01 नवंबर 2016 को शुरू की गई सौर सुजला योजना का उद्देश्य कृषि भूमि की सिंचाई क्षमता बढ़ाने के साथ उन क्षेत्रों में भी सिंचाई सुविधा पहुंचाना है, जहां बिजली की उपलब्धता सीमित है। योजना के तहत किसानों के खेतों में 03 एचपी और 05 एचपी क्षमता के सोलर सिंचाई पंप स्थापित किए जा रहे हैं। इन पंपों में सोलर मॉड्यूल और कंट्रोलर शामिल होते हैं।
सौर सुजला योजना के तहत किसानों को कम अंशदान में सोलर पंप की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। 03 एचपी सोलर पंप की औसत लागत लगभग 2.64 लाख रुपये और 05 एचपी पंप की औसत लागत लगभग 3.64 लाख रुपये है। 03 एचपी पंप के लिए अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के हितग्राहियों का अंशदान 7 हजार रुपये, अन्य पिछड़ा वर्ग का 12 हजार रुपये तथा सामान्य वर्ग का 18 हजार रुपये निर्धारित है। इसी प्रकार 05 एचपी पंप के लिए क्रमशः 10 हजार, 15 हजार और 20 हजार रुपये अंशदान निर्धारित है। इसके अतिरिक्त निर्धारित प्रोसेसिंग शुल्क देय है। सोलर पंप मिलने से किसानों की बिजली पर निर्भरता कम हो रही है और सिंचाई सुविधा का विस्तार हो रहा है। सिंचाई उपलब्ध होने से किसान केवल धान की खेती तक सीमित न रहकर मक्का, गेहूं, दलहन-तिलहन, गन्ना, साग-सब्जियों और बागवानी फसलों की ओर भी बढ़ रहे हैं। इससे फसल विविधीकरण को बढ़ावा मिलने के साथ किसानों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर भी तैयार हो रहे हैं।
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योजना के माध्यम से सौर ऊर्जा और जल संरक्षण के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है। गौठानों एवं चारागाहों में पशुधन के पेयजल, सिंचाई और अन्य आवश्यक उपयोगों के लिए भी सोलर पंप लगाए जा रहे हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा मिलने के साथ कृषि और पशुधन आधारित गतिविधियों को भी मजबूती मिल रही है। सौर सिंचाई पंप एवं स्थापित उपकरणों पर पांच वर्ष की नि:शर्त ऑन-साइट वारंटी के साथ पांच वर्ष की बीमा सुविधा भी उपलब्ध है। चोरी, क्षति अथवा टूट-फूट की स्थिति में निर्धारित प्रावधानों के अनुसार संयंत्र के सुधार की व्यवस्था है। इसके अलावा सोलर सिंचाई संयंत्रों के पांच वर्षीय संचालन-संधारण एवं रख-रखाव का भी प्रावधान किया गया है।
हितग्राहियों की सुविधा के लिए सौर पंप से संबंधित शिकायत दर्ज कराने हेतु टोल फ्री नंबर 18001234591 उपलब्ध है। प्राप्त शिकायतों की ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से निगरानी की जाती है और संबंधित स्थापनाकर्ता इकाई द्वारा निर्धारित अवधि में उनका निराकरण किया जाता है। योजना का लाभ लेने के लिए किसान के पास स्वयं की कृषि भूमि और पर्याप्त जल स्रोत होना आवश्यक है। इच्छुक किसान संबंधित ग्राम सेवक, कृषि विभाग अथवा क्रेडा कार्यालय से आवेदन प्राप्त कर सकते हैं। जांच एवं अनुशंसा के बाद क्रेडा द्वारा स्थल सर्वेक्षण कर पंप की क्षमता और प्रकार का आकलन किया जाता है। निर्धारित हितग्राही अंश एवं प्रोसेसिंग शुल्क प्राप्त होने के बाद सोलर पंप स्थापित किया जाता है।
सौर सुजला योजना किसानों को सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराने के साथ खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। सिंचाई सुविधा से उत्पादन, फसल विविधीकरण और किसानों की आय बढ़ाने के अवसरों को बल मिल रहा है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है और ऊर्जा, जल तथा कृषि के बेहतर समन्वय से आत्मनिर्भर किसान की परिकल्पना को आगे बढ़ाया जा रहा है।
