दुर्ग। दीपावली जैसे बड़े त्योहार के ठीक पहले सरकारी राशन दुकानों की अव्यवस्था ने आम राशनकार्डधारियों की परेशानी बढ़ा दी है। कहीं शक्कर उपलब्ध नहीं है, तो कहीं राशनकार्ड के क्रमांक बदल जाने से हितग्राही अपने ही राशन के लिए भटकने को मजबूर हैं। इस अव्यवस्था पर वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं दुर्ग शहर के पूर्व विधायक अरुण वोरा ने भाजपा सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि त्योहार के समय लोगों को राहत देने के बजाय सरकार ने उन्हें नई मुश्किलों में डाल दिया है।
अरुण वोरा ने बताया कि सहायक खाद्य अधिकारी से चर्चा के दौरान उन्हें जानकारी दी गई कि पिछले चार महीनों से राशन दुकानों में वितरण के लिए शक्कर उपलब्ध ही नहीं है। यह स्थिति बेहद गंभीर है। दीपावली हर घर में खुशियां और मिठास बांटने का अवसर है। ऐसे समय में जिन परिवारों की त्योहार की तैयारियां सार्वजनिक वितरण प्रणाली से मिलने वाले राशन पर निर्भर हैं, वे आखिर मिठाइयां कैसे बनाएंगे? सरकार को यह समझना चाहिए कि राशन में मिलने वाली शक्कर कई जरूरतमंद परिवारों के लिए त्योहार की मिठास का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
उन्होंने राशनकार्ड के क्रमांक में बिना पूर्व सूचना किए गए बदलाव पर भी गंभीर आपत्ति जताई। वोरा ने बताया कि राशनकार्ड लेकर दुकान पहुंच रहे हितग्राहियों को मशीन में पुराना क्रमांक बदल जाने के कारण राशन प्राप्त करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अब उन्हें आधार कार्ड लेकर दोबारा दुकान पहुंचने और नए क्रमांक की जानकारी लेने को कहा जा रहा है। ऐसे में आम नागरिक एक ही काम के लिए बार-बार राशन दुकानों के चक्कर काट रहे हैं।
वोरा ने सवाल किया कि राशनकार्ड के क्रमांक में बदलाव करना आवश्यक था तो इसकी पूर्व सूचना हितग्राहियों को क्यों नहीं दी गई? व्यवस्था में बदलाव की जिम्मेदारी सरकार और विभाग की है, फिर उसकी परेशानी आम जनता क्यों भुगते? त्योहार के समय लोगों को राशन के लिए भटकाना कहां तक उचित है? उन्होंने मांग की कि राशन दुकानों में शक्कर की उपलब्धता तत्काल सुनिश्चित की जाए और कार्डधारियों को नए क्रमांक की जानकारी देने के लिए सरल व्यवस्था बनाई जाए, ताकि किसी भी हितग्राही को उसके अधिकार के राशन से वंचित न रहना पड़े.
पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेश शर्मा ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा सरकार को जनता की वास्तविक परेशानियों का जवाब देना चाहिए। त्योहार के समय लोगों को सहूलियत मिलनी चाहिए, न कि सरकारी अव्यवस्थाओं के कारण उनकी मुश्किलें और बढ़नी चाहिए।

