7-8 महीने से सड़क निर्माण अधूरा, धनोरा और हनोदा जाने वाले ग्रामीणों को 4-5 किलोमीटर अतिरिक्त सफर करने की मजबूरी, व्यापारी और दुकानदार भी परेशान, रोजाना करीब 20 हजार लोग प्रभावित
दुर्ग। महाराजा चौक से बोरसी चौक तक सड़क चौड़ीकरण का काम पिछले 7-8 महीनों से अधूरा पड़ा है। निर्माण कार्य में हो रही देरी और मार्ग में बनी अव्यवस्थाओं के कारण आम जनता भारी परेशानियों का सामना कर रही है। खासकर धनोरा और हनोदा सहित आसपास के गांवों में आने-जाने वाले लोगों को मार्ग परिवर्तन के चलते प्रतिदिन 4 से 5 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। इससे लोगों का समय और पैसा दोनों बर्बाद हो रहे हैं।
सड़क निर्माण अधूरा होने से क्षेत्र के व्यापारी और दुकानदार भी खासे परेशान हैं। मार्ग की बदहाली और आवागमन में हो रही दिक्कतों के कारण दुकानों तक ग्राहकों की पहुंच प्रभावित हो रही है, जिससे व्यापार पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, इस मार्ग से रोजाना करीब 20 हजार लोग आवागमन करते हैं, ऐसे में सड़क निर्माण में देरी का असर बड़ी आबादी पर पड़ रहा है।
इसी दौरान वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं दुर्ग के पूर्व विधायक अरुण वोरा एक कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे। रास्ते में परेशान नागरिकों ने उनका वाहन रुकवाकर अपनी समस्याएं बताईं। लोगों ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि पिछले कई महीनों से सड़क की समस्या झेल रहे हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई ठोस समाधान नहीं किया जा रहा है। आखिर कब तक जनता धैर्य की परीक्षा देती रहेगी?
जनता की परेशानी सुनने के बाद अरुण वोरा ने सड़क निर्माण में हो रही देरी पर गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि सड़क विकास के नाम पर महीनों तक जनता को परेशानी में रखना किसी भी स्थिति में उचित नहीं है। प्रशासन और संबंधित विभाग की जिम्मेदारी है कि निर्माण कार्य समय-सीमा में पूरा कराए और तब तक आवागमन के लिए सुरक्षित एवं सुविधाजनक वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करे।
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उन्होंने कहा कि यह केवल एक सड़क का मामला नहीं है, बल्कि हजारों नागरिकों के रोजमर्रा के आवागमन, व्यापार, रोजगार और ग्रामीण क्षेत्रों की कनेक्टिविटी से जुड़ा गंभीर विषय है। 7-8 महीने बीत जाने के बाद भी यदि जनता को राहत नहीं मिल रही है तो यह प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल है।
अरुण वोरा ने प्रशासन से मांग की कि सड़क चौड़ीकरण का कार्य युद्धस्तर पर पूरा कराया जाए और अनावश्यक देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए। जनता को अब आश्वासन नहीं, काम पूरा होने की तारीख और राहत चाहिए।

