नई दिल्ली। भारत सरकार ने कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने और पर्यावरण को प्रदूषण मुक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। देश में मौजूदा E20 (20% एथेनॉल मिश्रित) पेट्रोल की सफल बिक्री के बाद अब सरकार ने पेट्रोल में 30% तक एथेनॉल मिलाने (E30) की तैयारी शुरू कर दी है। इसके तहत ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) ने E22, E25, E27 और E30 जैसे उच्च एथेनॉल मिश्रित ईंधनों के नए गुणवत्ता मानक अधिसूचित किए हैं, जो 15 मई 2026 से प्रभावी हो चुके हैं।
सरकार इस लक्ष्य को एक साथ लागू करने के बजाय चरणबद्ध (स्टेप-बाय-स्टेप) तरीके से आगे बढ़ाएगी। इसका मुख्य उद्देश्य आम वाहन चालकों को होने वाली परेशानियों से बचाना है, ताकि ईंधन की गुणवत्ता बनी रहे और वाहनों के इंजन पर भी कोई प्रतिकूल असर न पड़े। इस नीति से देश के कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी आने की उम्मीद है।
एथेनॉल की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए सरकार इसके उत्पादन के स्रोतों में भी विस्तार कर रही है। पहले जहां एथेनॉल मुख्य रूप से गन्ने के रस और शीरे से बनाया जाता था, वहीं अब मक्का, टूटे चावल और अन्य खराब अनाजों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। वर्तमान में भारत की एथेनॉल उत्पादन क्षमता लगभग 2 अरब लीटर तक पहुंच चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि, इस कदम से न केवल विदेशी मुद्रा की बचत होगी, बल्कि किसानों, चीनी मिलों और घरेलू बायोफ्यूल उद्योग को भी एक बड़ा आर्थिक बढ़ावा मिलेगा। नीति आयोग की विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट के आधार पर इस पूरे रोडमैप को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।
