मनरेगा से बदली गांव की तस्वीर : तालाब गहरीकरण से बढ़ा जलस्तर, किसानों को सालभर सिंचाई सुविधा

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के अंतर्गत किए गए तालाब गहरीकरण कार्य ने ग्रामीणों के जीवन में बड़ा बदलाव लाया है। जनपद पंचायत शंकरगढ़ अंतर्गत ग्राम पंचायत डिपाडीहकला स्थित पुरैन तालाब के गहरीकरण से अब गांव में वर्षभर जल उपलब्धता सुनिश्चित हो रही है, जिससे किसानों को सिंचाई, पशुपालन और रोजगार के क्षेत्र में सीधा लाभ मिल रहा है।

मनरेगा से बदली गांव की तस्वीर : तालाब गहरीकरण से बढ़ा जलस्तर, किसानों को सालभर सिंचाई सुविधा

करीब 9 लाख 8 हजार रुपये की लागत से पूर्ण हुए इस कार्य में श्रम मद से 8 लाख 54 हजार रुपये तथा सामग्री मद से 54 हजार रुपये व्यय किए गए। निर्माण कार्य के दौरान 1044 मानव-दिवस सृजित हुए, जिससे ग्रामीण श्रमिकों को गांव में ही रोजगार उपलब्ध हुआ और पलायन की समस्या में कमी आई। ग्रामीण किसानों के अनुसार, पहले खेती पूरी तरह वर्षा पर निर्भर थी। गर्मियों में तालाब सूख जाने से रबी फसल लेना मुश्किल हो जाता था और पशुओं के लिए पानी की भी गंभीर समस्या रहती थी। तालाब गहरीकरण के बाद अब वर्षा जल का बेहतर संचयन हो रहा है और लंबे समय तक पानी उपलब्ध रहने से किसानों को समय पर सिंचाई सुविधा मिल रही है।

तालाब से आसपास की लगभग 9 एकड़ कृषि भूमि में खेती करने वाले 12 किसानों को प्रत्यक्ष लाभ मिल रहा है। अब किसान खरीफ के साथ-साथ रबी फसल की खेती भी कर पा रहे हैं, जिससे उनकी आय में वृद्धि की उम्मीद बढ़ी है। ग्रामीणों का कहना है कि अब गर्मी के मौसम में भी पशुओं के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध रहता है, जिससे जल संकट काफी हद तक कम हुआ है। तकनीकी सहायक की देखरेख में नियमानुसार कार्य कराया गया तथा सतत निगरानी के कारण तालाब की जल संग्रहण क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। जिला प्रशासन का मानना है कि मनरेगा अंतर्गत इस प्रकार के जल संरक्षण आधारित कार्य ग्रामीण विकास और कृषि सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो रहे हैं।