वॉशिंगटन/तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्धविराम (सीजफायर) और बातचीत के दौर के बावजूद दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेना ने सोमवार को दक्षिणी ईरान में होर्मुज स्ट्रेट के पास एक बड़ी सैन्य कार्रवाई को अंजाम देते हुए ईरान के मिसाइल लॉन्च ठिकानों और रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के जहाजों को नष्ट कर दिया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, यह पूरी कार्रवाई अमेरिकी सैनिकों और युद्धपोतों की सुरक्षा के लिए ‘आत्मरक्षा’ (सेल्फ-डिफेंस) में की गई है।
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यह विवाद तब शुरू हुआ जब होर्मुज स्ट्रेट में ईरान की दो सैन्य नावों को समुद्री बारूदी सुरंगें (माइंस) बिछाते हुए देखा गया। इसके तुरंत बाद अमेरिकी नौसेना और वायुसेना ने संयुक्त रूप से मोर्चा संभाला और जवाबी कार्रवाई करते हुए दोनों नावों को समुद्र में ही ढे़र कर दिया। इसके अलावा, अमेरिकी सेना ने ईरान के बंदर अब्बास क्षेत्र में स्थित एक ‘सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल’ (SAM) साइट पर भी हवाई हमला किया, जिसने अमेरिकी लड़ाकू विमानों को निशाना बनाने की कोशिश की थी। इस सटीक हमले में ईरानी मिसाइल लॉन्चर और उससे जुड़े सैन्य ढांचे को पूरी तरह तबाह कर दिया गया।
CENTCOM के प्रवक्ता कैप्टन टिम हॉकिन्स ने साफ किया कि अमेरिका सीजफायर का सम्मान करते हुए संयम बरत रहा है, लेकिन अपने सैनिकों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा। अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस हमले को बेहद सीमित दायरे में रखा गया ताकि ईरान के साथ तनाव और ज्यादा न भड़के। बहरहाल, युद्धविराम के बावजूद हुए इस बड़े हमले ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है।
