गर्मी और बरसात के मौसम में कीड़े-मकोड़ों की संख्या बढ़ जाती है। कई बार छोटे कीड़े अनजाने में कान में चले जाते हैं, जिससे तेज बेचैनी, गुदगुदी, दर्द या घबराहट महसूस हो सकती है। ऐसी स्थिति में लोग अक्सर जल्दबाजी में कान में पिन, माचिस की तीली या अन्य नुकीली चीजें डालने की कोशिश करते हैं, जो नुकसानदायक साबित हो सकती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, कान में कीड़ा जाने पर सबसे पहले शांत रहना जरूरी है। घबराहट में किए गए गलत उपाय कान के पर्दे को नुकसान पहुंचा सकते हैं और संक्रमण का खतरा बढ़ा सकते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि कान में किसी भी प्रकार की नुकीली वस्तु डालने से बचना चाहिए।
अगर कान में कीड़ा चला जाए, तो प्रभावित कान को नीचे की ओर झुकाकर रखें। कई बार ऐसा करने से कीड़ा खुद ही बाहर निकल सकता है। यदि इससे राहत न मिले, तो सामान्य स्थिति में हल्का गुनगुना तेल या बेबी ऑयल की कुछ बूंदें कान में डाली जा सकती हैं। इससे कीड़ा निष्क्रिय हो सकता है और बाहर निकलने में आसानी होती है। हालांकि, यदि कान में तेज दर्द, खून आना, सुनने में परेशानी या लगातार बेचैनी बनी रहे, तो घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय तुरंत ईएनटी विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए। बच्चों के मामले में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बरसात और गर्मी के मौसम में घर की साफ-सफाई बनाए रखना, खिड़कियों पर जाली लगाना और कीड़ों को घर में प्रवेश करने से रोकना भी जरूरी है। सही जानकारी और समय पर सावधानी अपनाकर कान से जुड़ी गंभीर समस्याओं से बचा जा सकता है।
