नई दिल्ली। मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) का एक्शन लगातार तेज होता जा रहा है। इस महाघोटाले के मास्टरमाइंड और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) से जुड़े प्रोफेसर पीवी कुलकर्णी की गिरफ्तारी के बाद अब जांच की आंच पुणे की एक ब्यूटीशियन तक पहुंच गई है। सीबीआई और पुणे पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक संयुक्त ऑपरेशन चलाकर बिबवेवाड़ी इलाके से मनीषा वाघमारे नाम की महिला को गिरफ्तार किया है, जिसे दो दिन पहले हिरासत में लेकर कड़ी पूछताछ की जा रही थी। इसके साथ ही धनंजय लोखंडे नाम के एक अन्य संदिग्ध को भी पकड़ा गया है।
इस गिरफ्तारी के बाद जो सबसे चौंकाने वाला खुलासा हुआ है, वह है मनीषा का बैंक नेटवर्क। जांच एजेंसियों के मुताबिक, पेशे से ब्यूटीशियन इस महिला के नाम पर एक-दो नहीं, बल्कि कुल 21 बैंक खाते चल रहे थे। इन खातों में नीट परीक्षा के ठीक आसपास करीब 10 लाख रुपये का संदिग्ध लेन-देन हुआ था। सीबीआई का दावा है कि, मनीषा इस पूरे रैकेट में एक मुख्य एजेंट के तौर पर काम कर रही थी। वह मेडिकल सीट पाने की चाह रखने वाले छात्रों और उनके परेशान अभिभावकों से सीधे संपर्क करती थी, उनसे मोटी रकम वसूलती थी और फिर उसे आगे मुख्य नेटवर्क तक पहुंचाती थी।
सीबीआई अब इस पूरे घोटाले के ‘मनी ट्रेल’ (पैसों के लेन-देन) को खंगालने में जुटी है। जांच में सामने आया है कि, यह गिरोह छात्रों को ‘गेस पेपर’ के नाम पर बेवकूफ बना रहा था। आरोपियों ने दावा किया था कि, असली परीक्षा के 180 में से 150 सवाल उनके दिए मॉक पेपर से ही आएंगे। इसके एवज में छात्रों से 30 हजार रुपये एडवांस ऑनलाइन लिए गए थे। सीबीआई मुख्यालय में अब इस रैकेट से जुड़े सभी आरोपियों के बैंक ट्रांजैक्शन, व्हाट्सएप चैट और डिजिटल रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं ताकि देशव्यापी फैले इस संगठित अपराध की पूरी कड़ियाँ जोड़ी जा सकें।
