NEET-UG विवाद में बड़ा मोड़: FAIMA के बाद यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, NTA को भंग करने की उठी मांग

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नई दिल्ली। मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 में हुए पेपर लीक और कथित व्यवस्थागत विफलता (सिस्टेमैटिक फेलियर) को लेकर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) के बाद अब एक और बड़े संगठन, यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट (UDF) ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर एनटीए को उसके मौजूदा स्वरूप में पूरी तरह भंग करने की मांग की है। देश भर के छात्रों और अभिभावकों में फैले भारी गुस्से के बीच कोर्ट पहुंची इस याचिका ने परीक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दाखिल अपनी याचिका में दलील दी है कि सोसायटी रजिस्ट्रेशन एक्ट 1860 के तहत बनी मौजूदा एनटीए पूरी तरह नाकाम साबित हुई है। संगठन की मांग है कि इस एजेंसी को खत्म कर संसद के विशेष कानून के जरिए एक नई और जवाबदेह वैधानिक राष्ट्रीय परीक्षा संस्था का गठन किया जाना चाहिए। याचिका में आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2021, 2024 और अब 2026 में लगातार सामने आ रही पेपर लीक और गड़बड़ियों की घटनाओं ने देश के परीक्षा सिस्टम की कमियों को उजागर किया है, जिससे लाखों युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ हो रहा है।

इससे पहले FAIMA की ओर से पैरवी कर रही वकील तन्वी दुबे ने भी सुप्रीम कोर्ट से नीट परीक्षा के पारदर्शी संचालन के लिए एक हाई-लेवल कमेटी नियुक्त करने की गुहार लगाई थी, जो परीक्षा कराने वाली संस्था के कामकाज की निगरानी कर सके। डॉक्टरों के इन शीर्ष संगठनों का साफ कहना है कि अब परीक्षा प्रणाली में बुनियादी और संरचनात्मक सुधार (स्ट्रक्चरल रिफॉर्म) बेहद जरूरी हो चुके हैं ताकि भविष्य में ऐसी बड़ी नाकामियों को दोबारा होने से रोका जा सके।