रायपुर। छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने और स्थानीय युवाओं को नर्सिंग शिक्षा से जोड़ने के उद्देश्य से संचालित जीएनएम प्रशिक्षण केंद्र आज क्षेत्र में शिक्षा और रोजगार का एक सशक्त माध्यम बन चुका है। यह संस्थान न केवल जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूती दे रहा है, बल्कि स्थानीय बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उल्लेखनीय है कि नारायणपुर में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए वर्ष 2014 में सबसे पहले एएनएम प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना की गई थी। बाद में, क्षेत्र की बढ़ती आवश्यकताओं और बेहतर चिकित्सा सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2017 में इस संस्थान का उन्नयन कर इसे जीएनएम प्रशिक्षण केंद्र के रूप में संचालित किया जाने लगा।
प्रवेश के नियम और शासन से मदद
वर्तमान में इस प्रशिक्षण केंद्र में कुल 40 सीटों पर प्रवेश की व्यवस्था है, जहां हर साल अक्टूबर- नवंबर माह में नया शैक्षणिक सत्र शुरू होता है। यह 3 वर्षीय डिप्लोमा पाठ्यक्रम है। प्रवेश के लिए अभ्यर्थियों का 12वीं (विज्ञान विषय) उत्तीर्ण होना और न्यूनतम आयु 18 वर्ष होना अनिवार्य है। ज्ञात हो कि यह केंद्र पूर्णतः आवासीय है, जहां वर्तमान में 108 छात्राएं रहकर पढ़ाई कर रही हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की छात्राओं के लिए शासन द्वारा छात्रवृत्ति (स्कॉलरशिप) की सुविधा भी दी जा रही है।
90 फीसदी छात्राओं को मिला रोजगार
संस्थान की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2017 से लेकर सत्र 2023-24 तक यहाँ से कुल 182 विद्यार्थी सफलतापूर्वक उत्तीर्ण हो चुके हैं। गर्व की बात यह है कि इनमें से लगभग 90 प्रतिशत विद्यार्थी वर्तमान में विभिन्न शासकीय, अर्धशासकीय एवं निजी चिकित्सा संस्थानों में स्टाफ नर्स के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
उच्च शिक्षा और एम्स में करियर बनाने का मौका
जीएनएम पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद छात्राओं के लिए उच्च शिक्षा के द्वार भी खुले हैं। यहां से उत्तीर्ण छात्राएं आगे बीएससी नर्सिंग में प्रवेश लेकर अपने कौशल को और निखार सकती हैं। इसके बाद वे विभिन्न बड़े अस्पतालों में नर्सिंग ऑफिसर, नर्सिंग ट्यूटर और एम्स जैसे देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में सेवाएं देने के लिए पात्र हो जाती हैं। नारायणपुर का यह संस्थान आज स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि बनकर उभरा है। यह न सिर्फ बस्तर के युवाओं को स्वावलंबी बना रहा है, बल्कि अंदरूनी क्षेत्रों के लिए दक्ष स्वास्थ्य कर्मियों की एक नई पीढ़ी भी तैयार कर रहा है।
