पश्चिम बंगाल। बहरामपुर में चुनावी माहौल के बीच कांग्रेस प्रत्याशी अधीर रंजन चौधरी के साथ धक्का-मुक्की की घटना सामने आई है। आरोप है कि जनसंपर्क के दौरान तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कार्यकर्ताओं के साथ उनकी तीखी झड़प हो गई, जो देखते ही देखते धक्का-मुक्की में बदल गई। इस घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल बन गया है। पश्चिम बंगाल के पूर्व अध्यक्ष व बहरामपुर से कांग्रेस प्रत्याशी अधीर रंजन चौधरी के साथ धक्का मुक्की की घटना हुई है। आज सुबह बहरामपुर के वार्ड नंबर 19 में जनसंपर्क कर रहे थे।
बहरामपुर के पूर्व सांसद अधीर रंजन चौधरी ने प्रशासन द्वारा मुहैया कराई गई सुरक्षा व्यवस्था पर भी चिंता जताई है। उन्होंने गुरुवार को कहा था कि बहरामपुर की जनता के साथ उनका लंबा रिश्ता अब भी मजबूत है। उन्होंने कहा कि जो दृश्य आप देख रहे हैं, उनसे साफ है कि हवा बदल रही है और माहौल बदल रहा है। मुझे पूरा विश्वास है कि यहां की आम जनता मुझे अपना आशीर्वाद और समर्थन देगी।पांच बार सांसद रह चुके अधीर रंजन चौधरी 30 साल बाद विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं। वे कांग्रेस को पश्चिम बंगाल में फिर से मजबूत करने की कोशिश में हैं। बहरामपुर सीट पर उनका मुकाबला भाजपा के सुब्रत मोइत्रा और TMC के नारू गोपाल मुखर्जी से है।
अधीर चौधरी ने सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर अपने क्षेत्र में विकास कार्यों को रोकने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि रेलवे से जुड़े कई प्रोजेक्ट लंबे समय से अटके पड़े हैं क्योंकि TMC उन्हें पूरा नहीं होने देना चाहती। रेलवे का काम यहां इसलिए अधूरा पड़ा है क्योंकि वे नहीं चाहते कि जहां से मैं चुनाव लड़ रहा हूं, वहां कोई काम हो।रेलवे पूरा फंड देने को तैयार था, राज्य सरकार को एक पैसा भी खर्च नहीं करना पड़ता, फिर भी काम नहीं हो रहा है। वे यह बर्दाश्त नहीं कर सकते कि अधीर चौधरी को कोई क्रेडिट मिले।उन्होंने आगे आरोप लगाया कि मुख्य मुद्दा यही है कि अधीर चौधरी की तारीफ कोई न करे, उन्हें कोई क्रेडिट न मिले। सारा क्रेडिट ममता बनर्जी को ही जाना चाहिए। इसके लिए अगर पश्चिम बंगाल को नुकसान भी हो जाए, तो ममता बनर्जी ‘ममता श्री’ बनी रहना चाहती हैं।
कांग्रेस ने इस घटना को सुनियोजित हमला बताते हुए TMC को सीधे जिम्मेदार ठहराया है। अधीर रंजन चौधरी का दावा है कि विपक्ष की आवाज दबाने के लिए इस तरह की घटनाएं करवाई जा रही हैं। श्चिम बंगाल में पहले भी चुनाव के दौरान हिंसा की घटनाएं सामने आती रही हैं। इस ताजा घटना ने राज्य के चुनावी माहौल को और ज्यादा संवेदनशील बना दिया है। आने वाले दिनों में इसका असर प्रचार अभियान और राजनीतिक रणनीतियों पर भी पड़ सकता है।
