जवारा विसर्जन : सैकड़ो शक्ति के उपासकों ने लोहे के बाना व सांग धारण कर निकाली शोभायात्रा

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रायपुर। राजधानी रायपुर में नौ दिन तक चले चैत्र नवरात्रि उत्सव का समापन शुक्रवार को ज्योति कलश विसर्जन के साथ हो गया। शहर के अलग-अलग सामाजिक व धार्मिक संगठन के महिला और पुरुष ज्योति कलश और गालों व पूरे शरीर में लोहे का बाना धारण किए शोभायात्रा निकाली। जय भवानी व मां दुर्गा के जयकारे के साथ भक्तों ने उन्हें भक्तिभाव के साथ जावरा का विसर्जन किया। डीजे व धूमाल के साथ छत्तीसगढ़ी जस गीतों व भजनों की धुन पर श्रद्धालु नाचते हुए नजदीकी नदी-तालाब तक पहुंचे और जवारा विसर्जित किया। शहर के कंकाली तालाब में ज्योति कलश का विसर्जन शुरू हुआ। इस दौरान शहर के रामसागरपारा, जोरापारा, मागड़ा पारा, न्यू राजेन्द्र नगर, पवन विहार, रायपुरा, आमापारा, बजरंग नगर, केलकरपारा, ब्रम्हपुरी सहित अलग-अलग मोहल्ले से हजारों की संख्या में श्रद्धालु विसर्जन में शामिल हुए। विगत 11 वर्षों कंकाली पारा में नवयुवक दुर्गोत्सव समिति झण्डा चौक बढ़ईपारा द्वारा ज्योत जवारा सांग विसर्जन का भव्य स्वागत किया गया।

 

गालों व शरीर में लोहे के बाना

चैत्र में शक्ति की उपासना पूर्ण होने पर घरों व मंदिरों से जवारा शोभायात्राएं निकलीं गई । इस दौरान कंकाली तालाब से लेकर स्टेशन रोड तक जवारा विसर्जन जुलूस निकला गया। महिलाएं व पुरूष ज्योति कलश अपने सिर में धारण किए हुए थे, तो सैकड़ो शक्ति के उपासक अपने गालों व शरीर में लोहे के बाना व सांगों को धारण किए हुए शोभायात्रा में मुस्कुराते नाचते गाते चलते रहे।

जगह-जगह भंडारा का आयोजन

रामनवमी व जवारा विसर्जन को लेकर पूरे शहर में कई सेवा समितियों व जनप्रतिनिधियों द्वारा भंडारा का आयोजन किया गया। जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु प्रसादी लिए। शहर के मुख्य मंदिरों, चौक-चौराहों और धार्मिक स्थलों पर प्रसादी वितरण आयोजित किया गया, जहाँ भक्तों को पूरी, सब्जी, हलवा आदि प्रसाद के रूप में परोसा जाता है। यह परंपरा समानता और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देती है।