रायपुर। प्रदेश में 2000 से 2026 तक सीवर सैप्टिक टैंक से संबंधित कई मौतें हुई है। एक दावा के अनुसार सीवर सैप्टिक टैंक से हुई मौत के मामले में सात लोगों को अभी तक राज्य सरकार की ओर से मुआवजा नहीं दिया गया है। वहीं, राज्य सफाई कर्मचारी आंदोलन के राज्य संयोजक राजू भारतवासी ने बताया कि मानव बल सफाई श्रमिक सीवर सैप्टिक टैंक के खतरनाक मेनहोल में उतरकर अपनी जान गवाँ रहे । यह केवल एक दुर्घटना नहीं है। यह हमारी सामूहिक संवेदनहीनता का प्रमाण है। हर बार वही क्रम दोहराया जाता है मौत, शोक, मुआवजा, और फिर मौंन हर बार जब कोई सफाई कर्मचारी सीवर या सेप्टिक टैंक की जहरीली, अंधेरी गहराइयों में उतरता है, वह केवल अपना काम नहीं कर रहा होता बल्कि वह अपने जीवन को दांव पर लगा रहा होता है और जब वह लौटकर नहीं आता और शासन – प्रशासन एवं नगर निगमों की लापरवाही की भेंट चढ़ जाता है। सूत्रों के अनुसार राज्य में जिन 7 सफाई कर्मचारी श्रमिकों की मौत सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान हो चुकी है, उन्हें राज्य सरकार मृतक के आश्रित परिवारों को जीवन बीमा, एसी एसटी एक्ट के तहत किसी भी प्रकार की कोई राशि नहीं दी है। नियम के अनुसार 10-10 लाख का मुआवजा राशि सरकार की ओर से दी जानी चाहिए। जानकारी के अनुसार इस पूरे मामले में हाईकोर्ट में मुआवजा से सम्बंधित याचिका दायर की गई है।

पुनर्वास अधिनियम का खुलेआम उल्लंघन
गौरतलब है कि “हाथ से मैला ढोने पर प्रतिबंध और पुनर्वास अधिनियम, 2013” की धारा 7 सीवर या सेप्टिक टैंक की खतरनाक सफाई को प्रतिबंधित करती है। इस अधिनियम के अनुसार, भारत में 6 दिसंबर, 2013 से हाथ से मैला ढोने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। किसी भी व्यक्ति या संगठन को हाथ से मैला ढोने के लिए किसी को भी नियुक्त करने या काम पर रखने की अनुमति नहीं है। कोई भी व्यक्ति या संगठन जो किसी को हाथ से मैला ढोने के लिए नियुक्त करता है, वह इस अधिनियम में उल्लिखित प्रावधानों का उल्लंघन करता है और अधिनियम की धारा 8 के तहत दंड का सामना कर सकता है, जिसमें 2 वर्ष तक का कारावास, एक लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों शामिल हैं।

हरदीप सिंह गिल पूरे घटनास्थल को मैनुअल स्कैवेंजिंग का मामला बताया
राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग के उपाध्यक्ष हरदीप सिंह गिल घटनास्थल पहुंचे हुए थे । उन्होंने इसे मैनुअल स्कैवेंजिंग का मामला बताया। कहा कि यह कानूनन प्रतिबंधित होने के बावजूद कराई गई। हरदीप गिल ने पीड़ित परिवारों से भी मुलाकात की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मामले में एससी और एसटी एक्ट और मैनुअल स्कैवेंजिंग एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज किया जाए। दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, चाहे वह अस्पताल प्रबंधन का कर्मचारी हो या कोई बड़ा अधिकारी।
ऐसे मामलों में मुआवज़ा राज्य की जिम्मेदारी है
राज्य सफाई कर्मचारी आंदोलन के राज्य संयोजक राजू भारतवासी ने बताया कि 2013 का अधिनियम असुरक्षित सीवर और सेप्टिक टैंक में मानव प्रवेश को अपराध घोषित करता है और स्पष्ट करता है कि बिना सुरक्षा उपकरण, गैस डिटेक्टर, पीपीई किट और प्रशिक्षित टीम के किसी को उतारना दंडनीय है। सुप्रीम कोर्ट भी यह स्पष्ट कह चुका है कि ऐसे मामलों में मुआवज़ा राज्य की जिम्मेदारी है, पर न्यायालय का मूल उद्देश्य मौत के बाद भुगतान नहीं, मौत को रोकना था।
रामकृष्ण अस्पताल सैप्टिक टैंक कांड: पुलिस ने एट्रोसिटी की धारा जोड़ी
हाल ही में रायपुर के रामकृष्ण केयर अस्पताल में सैप्टिक टैंक में गिरने से तीन मजदूरों की दर्दनाक मौत का मामला सामने आया था । घटना के बाद टिकरापारा थाना पुलिस ने ठेकेदार और अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ एट्रोसिटी की धारा सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
