अमेरिका-चीन के बीच भारत का बैलेंस गेम, निवेश- व्यापार पर बड़ा फोकस

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नई दिल्ली। भारत ने 2026 में अमेरिका और चीन दोनों के साथ आर्थिक रिश्तों में संतुलन बनाने की रणनीति को आगे बढ़ाया है। एक ओर अमेरिका के साथ टैरिफ विवाद को बातचीत से सुलझाने की दिशा में प्रगति हुई, वहीं दूसरी ओर चीन से चुनिंदा क्षेत्रों में निवेश नियमों को सीमित तौर पर आसान बनाया गया है।सरकार ने 2020 में लागू प्रेस नोट-3 में संशोधन करते हुए कुछ मामलों में चीनी निवेश के लिए प्रक्रिया सरल की है। नए नियमों के तहत कम हिस्सेदारी वाली कंपनियों और पूंजीगत वस्तुओं, इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स तथा सौर ऊर्जा से जुड़े क्षेत्रों में मंजूरी की समयसीमा तय की गई है।

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सरकार के अनुसार, इन बदलावों के बाद कई परियोजनाओं में हजारों करोड़ रुपये का निवेश आया है। उधर, अमेरिका के साथ व्यापारिक संबंधों में भी अनिश्चितता कम करने की कोशिश हुई है, जिससे भारतीय निर्यातकों को राहत मिलने की उम्मीद है। इसी बीच भारत-चीन सीमा वार्ता में भी तेजी आई है और दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संवाद जारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि, भारत अब किसी एक देश पर निर्भर रहने के बजाय निवेश, व्यापार और सप्लाई चेन के लिए कई साझेदारों के साथ संतुलित रणनीति अपनाकर अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

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