सुकमा में बच्चों की सेहत और सुरक्षा पर प्रशासन सख्त, लापरवाही पर होगी सीधी कार्रवाई

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0 आरओ पानी, हेल्थ कार्ड और कंप्यूटर से लैस होंगे सुकमा के आवासीय विद्यालय
0 कलेक्टर ने व्यवस्था सुधारने 15 से 20 दिनों का दिया अल्टीमेटम

सुकमा। जिले के आवासीय विद्यालयों, आश्रमों और छात्रावासों में पढ़ने वाले बच्चों को सुरक्षित, स्वच्छ और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए जिला प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। सोमवार को आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में कलेक्टर अमित कुमार ने बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा और सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्थाओं की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि बच्चों की सेहत और सुविधाओं के मामले में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। लापरवाही सामने आने पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। विद्यार्थियों के स्वास्थ्य और स्वच्छता को प्राथमिकता देते हुए सभी परिसरों में डेडिकेटेड हैंडवॉश एरिया, नियमित शौचालय सफाई और आसपास ब्लीचिंग पाउडर के छिड़काव को अनिवार्य किया गया है। मौसमी बीमारियों और मच्छरों से बचाव के लिए खिड़कियों और रोशनदानों में मॉस्किटो नेट लगाने के भी निर्देश दिए गए हैं।

बच्चों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए प्रत्येक कक्ष के बाहर आरओ फिल्टर, पानी के ड्रम और हर बच्चे के लिए स्टील के गिलास की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है। साथ ही प्रत्येक छात्र का अनिवार्य हेल्थ कार्ड तैयार किया जाएगा, जिसमें उसकी नियमित स्वास्थ्य जांच का पूरा रिकॉर्ड दर्ज रहेगा। छात्रावासों में स्वच्छता और बेहतर सुविधा के लिए पुराने बिस्तरों की जगह नए बेडशीट उपलब्ध कराए जाएंगे। मेस में खाद्य सुरक्षा का विशेष ध्यान रखते हुए सभी खाद्य सामग्री को सुरक्षित और एयरटाइट कंटेनरों में रखने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा सुदूर क्षेत्रों के विद्यार्थियों को डिजिटल शिक्षा से जोड़ने के लिए जिन केंद्रों में कंप्यूटर की सुविधा नहीं है, वहां तत्काल कम से कम 5 नए कंप्यूटर सेट लगाने को कहा गया है। नए शौचालय या मुख्य मार्ग से जोड़ने वाली कनेक्टिंग रोड की जरूरत वाले परिसरों से प्रस्ताव तत्काल भेजने के निर्देश दिए गए हैं।

कलेक्टर ने पोटाकेबिन और आरएमएसए के लिए 15 दिन तथा आश्रम-छात्रावासों के लिए 20 दिन की समय-सीमा तय की है। उन्होंने स्वयं फील्ड में जाकर व्यवस्थाओं का जमीनी निरीक्षण करने की बात कही और अधीक्षकों एवं प्रभारियों को भोजन, पानी और साफ-सफाई की व्यक्तिगत निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी। जिला प्रशासन का यह रुख साफ करता है कि सुकमा के बच्चों को बेहतर स्वास्थ्य, सुरक्षित वातावरण और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने में किसी तरह की कमी नहीं छोड़ी जाएगी।