रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करेंगे 16 रक्षा उपक्रमों के वार्षिक प्रदर्शन की समीक्षा

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स्वदेशी तकनीक के विकास और रक्षा निर्यात बढ़ाने पर रहेगा जोर; सात रक्षा कंपनियां सरकार को देंगी लाभांश के चेक

नई दिल्ली । रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 1 सितंबर, 2026 को नई दिल्ली में सार्वजनिक क्षेत्र के 16 रक्षा उपक्रमों के वार्षिक कार्य-निष्पादन की समीक्षा करेंगे। समीक्षा बैठक में रक्षा क्षेत्र में नई स्वदेशी प्रौद्योगिकियों के विकास, आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने और रक्षा उत्पादों के निर्यात में वृद्धि पर विशेष जोर दिया जाएगा।

बैठक के दौरान सार्वजनिक क्षेत्र के सात रक्षा उपक्रमों के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक वित्त वर्ष 2025-26 के लिए सरकार की इक्विटी हिस्सेदारी पर प्राप्त लाभांश के चेक रक्षा मंत्री को सौंपेंगे। इनमें हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड, मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, भारत डायनेमिक्स लिमिटेड, गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड, बीईएमएल और मिधानी शामिल हैं।

चार पुस्तकों का होगा विमोचन
कार्यक्रम के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह चार पुस्तकों का विमोचन भी करेंगे। इनमें ‘आत्मनिर्भर डीपीएसयू-आत्मनिर्भरता की दिशा में डीपीएसयू की यात्रा, ‘दिशा  ‘एचएएल का आधुनिकीकरण रोडमैप  और ‘एचएएल का स्वदेशीकरण रोडमैप शामिल हैं।‘दिशा रक्षा क्षेत्र की प्रौद्योगिकियों और आधुनिक विनिर्माण प्रक्रियाओं के बारे में विद्यार्थियों को व्यावहारिक जानकारी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से रक्षा उपक्रमों की एक पहल है। वहीं, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड से संबंधित दोनों पुस्तकें कंपनी के आधुनिकीकरण और स्वदेशीकरण की दिशा में तैयार किए गए रोडमैप को सामने रखेंगी।

1.29 लाख करोड़ रुपये रहा कुल कारोबार
वित्त वर्ष 2025-26 में सार्वजनिक क्षेत्र के रक्षा उपक्रमों का प्रदर्शन उल्लेखनीय रहा। इन उपक्रमों का कुल कारोबार 1.29 लाख करोड़ रुपये रहा, जो वित्त वर्ष 2024-25 के मुकाबले 15.4 प्रतिशत अधिक है।इसी अवधि में रक्षा उपक्रमों ने कर पश्चात संचयी लाभ के रूप में 23,136 करोड़ रुपये दर्ज किए। यह पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 15.6 प्रतिशत की वृद्धि है।रक्षा निर्यात में 151.2 प्रतिशत की वृद्धिरक्षा क्षेत्र के निर्यात में भी सार्वजनिक क्षेत्र के रक्षा उपक्रमों ने उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। वित्त वर्ष 2025-26 में इनके निर्यात में पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 151.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

सरकार रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के साथ-साथ भारतीय रक्षा उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने पर लगातार जोर दे रही है। ऐसे में स्वदेशी प्रौद्योगिकियों के विकास और निर्यात विस्तार को आगामी कार्ययोजना में महत्वपूर्ण स्थान मिलने की उम्मीद है।
रक्षा उपक्रमों के बेहतर वित्तीय प्रदर्शन, बढ़ते निर्यात और स्वदेशीकरण की दिशा में हो रही प्रगति को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के लक्ष्य की ओर महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।