कोरबा। मानिकपुर खदान में 21 अगस्त 2026 को प्रस्तावित जनसुनवाई को प्रशासन ने आगामी आदेश तक स्थगित कर दिया है। कुसमुंडा के विकास नगर स्थित कोयला मजदूर सभा कार्यालय में बुधवार को होने वाली महत्वपूर्ण बैठक से ठीक पहले सामने आए इस फैसले को ग्रामीणों और यूनियनों के संयुक्त संघर्ष की बड़ी सफलता माना जा रहा है। विस्थापित ग्रामीणों और भू-विस्थापित संघ के पदाधिकारियों अध्यक्ष सुरेश पटेल, उपाध्यक्ष रम्मे लाल, सचिव जितेंद्र राव और कोषाध्यक्ष उदय पटेल ने 18 अगस्त को कोयला मजदूर सभा के केंद्रीय कार्यवाहक अध्यक्ष एवं संभाग प्रभारी केदारनाथ अग्रवाल को अपनी समस्याओं से संबंधित ज्ञापन सौंपा था। ग्रामीणों के विरोध और संगठन के रुख के बाद प्रशासन और एसईसीएल प्रबंधन ने फिलहाल जनसुनवाई की प्रक्रिया रोक दी है।
प्रशासन के इस फैसले के बाद यह स्पष्ट माना जा रहा है कि विस्थापितों की लंबित मांगों और पूर्व में किए गए आश्वासनों पर कार्रवाई किए बिना नई जनसुनवाई आगे नहीं बढ़ाई जाएगी। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन को पहले स्वास्थ्य, पेयजल, मुआवजा और न्यायसंगत पुनर्वास से जुड़ी लंबित मांगों का निराकरण करना चाहिए। 21 अगस्त को प्रस्तावित मानिकपुर खदान की जनसुनवाई को आगामी आदेश तक टाल दिया गया है। प्रशासन की ओर से पूर्व में किए गए वादों को पूरा करने और कानूनी प्रक्रियाओं के तहत आवश्यक कार्रवाई के लिए समय बढ़ाया गया है। भू-विस्थापित इसे अपनी मांगों की दिशा में महत्वपूर्ण जीत मान रहे हैं।
इस पूरे मामले में 12 से अधिक प्रभावित गांवों के ग्रामीणों की एकजुटता और केदारनाथ अग्रवाल के नेतृत्व में उठाए गए कदम को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बैठक में केदारनाथ अग्रवाल के साथ नौशाद खान, राकेश श्रीवास्तव, गिरिजा साहू, सुरेंद्र मिश्रा, अजीत पाण्डेय, अशोक साहू, शिव कुमार, सुगना बर्मन, विरेंद्र राठौर, मनोज सिंह, राजेश सिंह, दूजराम मिलन, गोपाल यादव, राजकुमार शर्मा, तोरण सिंह राठौड़, पाल वर्गीस, आशुतोष वर्मा, निरंजन सिंह, सोनू प्रताप सिंह, मनीष सिंह, देवेंद्र सिंह, अनंत त्रिपाठी, मोहम्मद ताजुद्दीन, शशांक खरे सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।
भू-विस्थापितों और कोयला मजदूर सभा ने स्पष्ट किया है कि जब तक पूर्व की सभी मांगों का धरातल पर ठोस समाधान नहीं हो जाता, तब तक वे अपने अधिकारों और न्याय की लड़ाई जारी रखेंगे।
