डॉ. पालेश्वर शर्मा छत्तीसगढ़ी गद्य सम्मान से विजय मिश्रा विभूषित, समन्वय साहित्य परिवार का बृहद साहित्यकार सम्मेलन सम्पन्न

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रायपुर। छत्तीसगढ़ी भाषा के गद्य जगत के युग प्रवर्तक डॉ. पालेश्वर शर्मा की 98 वीं जयंती पर बृहद साहित्यकार सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ राजभाषा के आयोग के अध्यक्ष प्रभात मिश्रा,अध्यक्ष डॉ. चित रंजन कर,रविशंकर विश्वविद्यालय के साहित्य भाषा अध्ययन शाला के पूर्व अध्यक्ष तथा विशिष्ट अतिथि की आसंदी से छत्तीसगढ़ विधानसभा के सचिव दिनेश मिश्रा, पाणिनीय शोध संस्थान की अध्यक्षा डॉ.पुष्पा दीक्षित, पूर्व विधायक चंद्रप्रकाश वाजपेई, विदूषी लेखिका सरला शर्मा एवं प्रख्यात नवगीतकार डॉ अजय पाठक शामिल हुए।

सम्मेलन में ऋषि- कृषि संस्कृति के उपासक,भाषाविद् कीर्तिशेष डॉ.पालेश्वर की स्मृति में पहला छत्तीसगढ़ी गद्य साहित्य सम्मान विजय मिश्रा ‘अमित’ को दिया गया। उनकी पचास वर्षीय साहित्य साधना का मूल्यांकन करते हुए समन्वय साहित्य परिवार के प्रबुद्ध निर्णायक मंडल ने विजय मिश्रा का चयन किया।पुरस्कार के अंतर्गत सम्मान राशि 5001/ रुपए के साथ ही प्रशस्ति पत्र, प्रतीक चिन्ह एवं शाल- श्रीफल से उन्हें सम्मानित किया गया।इसी क्रम में डॉ. पालेश्वर शर्मा स्मृति समन्वय रत्न अलंकरण सरला शर्मा एवं शशि दुबे को तथा आत्मीय सारस्वत सम्मान राजेश चौहान को दिया गया।

सम्मेलन के आरंभ में संस्था के प्रदेशाध्यक्ष डॉ देवधर महंत ने डॉ पालेश्वर शर्मा के व्यक्तित्व कृतित्व पर प्रकाश डाला। आगे मंचासीन अतिथियों ने अपने उद्बोधन में कीर्तिशेष डॉ शर्मा को छत्तीसगढ़ी साहित्य- संस्कृति ध्वजवाहक -उपासक, छत्तीसगढ़ी गद्य साहित्य का युग प्रवर्तक बताया।उनकी रचनाओं को कालजयी और नवपीढ़ी के लिए पथ-प्रदर्शक निरूपित किया।आभार प्रदर्शन संस्था के केंद्राध्यक्ष डॉ गंगाधर पटेल ने किया। सम्मेलन में डॉ शर्मा लिखित किताब छत्तीसगढ़ का इतिहास एवं परंपरा, गुड्डी के गोठ, समन्वय वार्षिक पत्रिका, सरला शर्मा की किताब रात जगा पाखी उवॉच, डॉ बरसाईत दास महंत रचित महाभारत काल में नारी तथा सम्पादक डॉ देवधर महंत की किताब कीर्तिशेष डॉ पालेश्वर का लोकार्पण विमोचन भी हुआ।