नई दिल्ली। आजकल सनस्क्रीन हमारे स्किनकेयर रूटीन का एक बेहद अहम हिस्सा बन चुकी है, खासकर गर्मियों के मौसम में। अधिकांश लोग घर से बाहर निकलने से पहले तो सनस्क्रीन लगा लेते हैं, लेकिन स्किन एक्सपर्ट्स का मानना है कि इसे हर कुछ घंटों में दोबारा (Re-apply) लगाना भी उतना ही जरूरी है। अगर आप ऐसा नहीं करते हैं, तो आपकी त्वचा को सूरज की हानिकारक अल्ट्रावॉयलेट (UV) किरणों से भारी नुकसान पहुंच सकता है।
दरअसल, त्वचा पर आने वाले पसीने, प्राकृतिक तेल (सीबम), स्विमिंग या बार-बार चेहरा पोंछने के कारण सनस्क्रीन की सुरक्षात्मक परत धीरे-धीरे हट जाती है। अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी की एक रिसर्च के मुताबिक, एक बार लगाई गई सनस्क्रीन पूरे दिन सुरक्षा नहीं दे सकती। धूप में रहने के दौरान हर दो घंटे में इसे दोबारा न लगाने से त्वचा यूवी रेडिएशन के प्रति संवेदनशील हो जाती है, जिससे त्वचा की प्राकृतिक सुरक्षात्मक क्षमता खत्म होने लगती है।
सनस्क्रीन दोबारा न लगाने का सबसे पहला और सीधा असर ‘सनबर्न’ के रूप में दिखता है। इसके कारण त्वचा पर लाल, दर्दनाक पैच और छाले पड़ सकते हैं। इसके अलावा, जब यूवी किरणें सीधे त्वचा के टिश्यूज को नुकसान पहुंचाती हैं, तो शरीर की हीलिंग प्रोसेस के कारण त्वचा में गंभीर सूजन, रेडनेस और जलन की समस्या बढ़ जाती है। जिन लोगों को पहले से ही मुंहासे, झाइयां या हाइपरपिग्मेंटेशन की शिकायत है, उनके काले धब्बे और ज्यादा गहरे होने लगते हैं। इसलिए धूप से होने वाले इस नुकसान और समय से पहले बुढ़ापे (एजिंग) को रोकने के लिए हर 2 घंटे में सनस्क्रीन लगाना बेहद जरूरी है।
