हजारों किलोमीटर का सफर तय कर छत्तीसगढ़ पहुंचते हैं विदेशी मेहमान पक्षी, प्रकृति का बढ़ाते हैं सौंदर्य

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खैरागढ़। विश्व प्रवासी पक्षी दिवस (World Migratory Bird Day) के अवसर पर एक बार फिर प्रवासी पक्षियों और उनके संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ाने की पहल की जा रही है। हर साल मई और अक्टूबर के दूसरे शनिवार को मनाए जाने वाले इस दिवस का उद्देश्य लोगों को यह बताना है कि, लंबी दूरी तय कर आने वाले ये पक्षी पर्यावरण संतुलन के लिए कितने महत्वपूर्ण हैं। छत्तीसगढ़ भी प्रवासी पक्षियों का प्रमुख ठिकाना बनता जा रहा है। सर्दियों के मौसम में साइबेरिया, रूस, मंगोलिया, यूरोप और मध्य एशिया से हजारों पक्षी लंबी उड़ान भरकर यहां पहुंचते हैं। अक्टूबर से मार्च तक प्रदेश के कई जलाशयों, नदियों और वेटलैंड क्षेत्रों में इनका डेरा देखने को मिलता है।

विशेषज्ञों के अनुसार छत्तीसगढ़ “सेंट्रल एशियन फ्लाईवे” का हिस्सा है, जिसके कारण विदेशी पक्षियों का यहां नियमित आगमन होता है। प्रदेश में ब्राह्मणी बतख, फ्लेमिंगो, पेलिकन, ब्लूथ्रोट और नॉर्दर्न शोवलर जैसे कई दुर्लभ पक्षी देखे जाते हैं। खैरागढ़, डोंगरगढ़, रायपुर, बिलासपुर, महानदी और शिवनाथ नदी के आसपास के क्षेत्र इन पक्षियों के पसंदीदा ठिकानों में शामिल हैं। यहां के तालाब और बांध कई महीनों तक रंग-बिरंगे पक्षियों से गुलजार रहते हैं। पर्यावरण विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि, बढ़ता प्रदूषण, जलाशयों का खत्म होना और अवैध शिकार इन पक्षियों के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है। ऐसे में इनके संरक्षण के लिए जागरूकता और प्राकृतिक आवासों को बचाना बेहद जरूरी है।