बस्तर । छत्तीसगढ के बस्तर की खूबसूरती देशभर के पर्यटकों को आकर्षित करती है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि, यहां से गुजरने वाली सैकड़ों टूरिस्ट बसें इन दर्शनीय स्थलों पर रुक ही नहीं रहीं। हर दूसरे दिन अलग-अलग राज्यों से पर्यटकों से भरी बसें दक्षिण भारत की ओर जाती हैं, मगर बस्तर के प्रमुख पर्यटन स्थल सिर्फ रास्ता बनकर रह गए हैं। चित्रकोट जलप्रपात, तीरथगढ़ जलप्रपात और दंतेवाड़ा जैसे मशहूर स्थानों पर बुनियादी सुविधाओं की कमी इसका मुख्य कारण बन रही है। बस संचालकों का कहना है कि, समूह यात्रियों के लिए किचन शेड, स्वच्छ पानी और पर्याप्त पार्किंग की व्यवस्था नहीं होने से रुकना मुश्किल हो जाता है।
यात्रियों के साथ खाना बनाने का सामान और रसोइए होते हैं, लेकिन पार्किंग स्थल से दूर सुविधाएं होने के कारण सामान ढोना परेशानी भरा हो जाता है। यही वजह है कि, ज्यादातर बसें बिना रुके आगे बढ़ जाती हैं। अनुमान है कि, हर महीने 100 से अधिक बसें बस्तर से गुजरती हैं, फिर भी स्थानीय पर्यटन को इसका कोई खास लाभ नहीं मिल रहा।
पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों का मानना है कि, अगर पार्किंग के पास ही भोजन शेड और पानी जैसी सुविधाएं उपलब्ध करा दी जाएं, तो बड़ी संख्या में पर्यटक यहां रुक सकते हैं। बस्तर में अपार पर्यटन संभावनाएं हैं, लेकिन बुनियादी ढांचे की कमी इसे पीछे धकेल रही है। अब जरूरत है कि योजनाओं को कागज से निकालकर जमीन पर उतारा जाए, ताकि बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता का वास्तविक लाभ स्थानीय लोगों और अर्थव्यवस्था को मिल सके।
